
नई दिल्ली: हिमालय पर्वत की श्रृंखलाएं हमारे देश की सुंदरता को और भी ज्यादा खूबसूरत बना देती है। इन्हें देखने की इच्छा भी सबकी होती है लेकिन इस पर्वत की ऊंची-ऊंची चोटियों को खतरनाक ट्रेकिंग के जरिये ही देखा जा सकता है। कोई चाहे कि हवाई जाहज में यात्रा करके हम इसकी खूबसूरती को निहार सकते है, तो ऐसा नहीं हो सकता है क्योंकि हिमालय के ऊपर से कोई भी यात्री विमान नहीं उड़ता है। आज हम आपको इके पीछे की वजह बताने वाले है।
ऑक्सीजन का स्तर और ऊंचाई है वजह
हिमालय पर्वत समुद्र तल से बहुत ज्यादा ऊंचाई पर है। इसकी चोटियां 23 हजार फीट और उससे भी ज्यादा ऊंची है, जो समताप मंडल यानि स्ट्रेटोस्फियर को छूती है। यहां पर हवा काफी पतली होती है और ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है। यात्री विमान समुद्र तल से 30-35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते है, ऐसे में उनके लिए हिमालय की ऊंचाई पर उड़ान भरना खतरनाक हो सकता है। विमान में इमरजेंसी के दौरान 20-25 मिनट की ऑक्सीज़न होती है और विमान को 8-10 हज़ार फीट नीचे आने के लिए इतना ही वक्त होता है। हिमालय में विमानों का इतने कम वक्त में नीचे आना नहीं हो सकता, जो उड़ान को खतरनाक बना देता है।
वहीं यात्रियों की सुविधानुसार विमान का तापमान और एयर प्रेशर सेट किया जाता है। हिमालय के इलाकों में मौसम में होने वाले बदलाव और हवा की असामान्य स्थिति के कारण विमान पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। जिससे विमान में सफर कर रहे यात्रियों को भी भारी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा आपातकाल के समय विमानों को कम से कम समय में नजदीकी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिग करनी पड़ जाती है। जबकि हिमालय के इलाकों में दूर-दूर तक कोई एयरपोर्ट मौजूद नहीं है। यही कारण हैं कि विमानों को बेशक घूम-फिरकर जाना पड़ जाए लेकिन वे हिमालय के ऊपर से उड़ान नहीं भरते।
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