Sawan Shivratri 2026: 11 सावन की शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त 2026 यानी मंगलवार को मनाया जाएगा। भगवान शिव को समर्पित यह दिन हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। सावन शिवरात्रि पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। अगर आप भी इस दिन व्रत रखने या शिवलिंग का अभिषेक करने जा रहे हैं तो पूजा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
शिवलिंग पर केतकी का फूल न चढ़ाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित किया था। इसलिए शिवलिंग पर केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। इसी तरह भगवान शिव की पूजा में तुलसी के पत्ते भी अर्पित नहीं किए जाते हैं।
हल्दी और सिंदूर से करें परहेज
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर हल्दी और सिंदूर नहीं चढ़ाना चाहिए। पूजा में भस्म, चंदन और अक्षत का इस्तेमाल किया जा सकता है। भगवान शिव को बेलपत्र बेहद प्रिय माना जाता है। हालांकि, पूजा के लिए हमेशा साफ और बिना कटे-फटे बेलपत्र का इस्तेमाल करना चाहिए। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है।
तांबे के बर्तन से दूध न चढ़ाएं
शिवलिंग पर दूध चढ़ाते समय कांस्य, पीतल या चांदी के पात्र का इस्तेमाल करने की धार्मिक मान्यता है। तांबे के पात्र से दूध चढ़ाने से बचने की सलाह दी जाती है। तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल चढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना भी वर्जित माना जाता है। पूजा के दौरान शिवलिंग की पूरी परिक्रमा करने के बजाय आधी परिक्रमा करने की परंपरा है। जल जिस स्थान से बाहर निकलता है, उसे सोमसूत्र या निर्मली कहा जाता है और इसे लांघना नहीं चाहिए।
11 अगस्त के प्रमुख शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:22 से 5:05 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:53 बजे तक
निशिता काल: रात 12:05 से 12:48 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:04 से 7:26 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर श्रद्धा और नियम के साथ भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
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