गन्ने के बिना अधूरी मानी जाती है मां लक्ष्मी की आराधना, जानें क्यों

गन्ने के बिना अधूरी मानी जाती है मां लक्ष्मी की आराधना, जानें क्यों

नई दिल्ली: दिवाली को धूमधाम से मानाने की तैयारी पूरे देशभर में चल रही है। वहीं हिंदू मानयताओ के मुताबिक इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते है। यहीं कारण है कि इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा अन्य देवी और देवताओं की पूजा से बेहद खास होती है। मां की पूजा का अपना महत्व है लेकिन मां की पूजन सामग्री का महत्व उससे भी ज्यादा है। जिसमें से एक गन्ना भी है।

इसलिए बेहद खास है मां की पूजा में गन्ना

ज्योतिषाचार्य संतोष शर्मा का कहना है कि पुराणों में मान्यता है कि मां लक्ष्मी का एक रूप गजलक्ष्मी भी है। यानि गज पर सवार होकर आने वाली देवी मां।  दिवाली की रात मां  अपने इसी रूप में एरावत हाथी पर सवार होकर भक्तों को आर्शीवाद देने के लिए भ्रमण करती है। चूंकि मां के लिए तो तरह- तरह के पकवान बनाकर पूजा में रखे जाते हैं लेकिन ऐरावत को भी भोजन कराने का विधान है। ऐेसे में हाथी का पसंदीदा खाद्य पदार्थ गन्ना भी पूजन में रखा जाता है।

पत्तों वाले दो गन्ने का विधान

ज्योतिषाचार्य संतोष शर्मा का कहना है कि लक्ष्मी पूजन में पत्तों वाले दो गन्ने रखे जाते है। जिसकी कुछ खास वजह तो नहीं है लेकिन दो अंक शुभता और पूर्णता का प्रतीक होने की वजह से ये संख्या में दो रखने का विधान है। जिनके बीच में मां को विराजित कर पूजा जाता है। शर्मा के अनुसार पूजा पाठ में खंडित वस्तु नहीं रखने के कारण गन्नों को पत्तों सहित रखा जाता है।

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