Liquor Policy Scam Case: बरी होने के बाद जनता के सामने आए अरविंद केजरीवाल, कहा- प्रधानमंत्री ने रचा षड्यंत्र

Liquor Policy Scam Case: बरी होने के बाद जनता के सामने आए अरविंद केजरीवाल, कहा- प्रधानमंत्री ने रचा षड्यंत्र

Liquor Policy Scam Case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत ने कथित शराब नीति घोटाला मामले में बरी कर दिया। इसके साथ ही इस मामले में शामिल 21 अन्य आरोपियों को भी अदालत ने आरोपमुक्त किया। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के आरोपपत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिससे AAP नेताओं को बड़ी राहत मिली।

ये मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। CBI ने आरोप लगाया था कि नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि अदालत ने कहा कि मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं और यह पूरी तरह से राजनीतिक षड्यंत्र प्रतीत होता है।

प्रधानमंत्री ने रचा षड्यंत्र- केजरीवाल

बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मैंने जिंदगी में केवल ईमानदारी कमाई है। आज कोर्ट ने साफ कर दिया कि मैं और मनीष कट्टर ईमानदार हैं। पिछले चार सालों में हमें काफी परेशान किया गया, लेकिन जज साहब ने साहस दिखाया और आज ऐतिहासिक फैसला सुनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा षड्यंत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मिलकर AAP के खिलाफ रचा। केजरीवाल ने कहा कि पार्टी के पांच बड़े नेताओं को जेल में डाला गया और उन पर फर्जी आरोप लगाए गए।

भाजपा के लिए बहुत बड़ा जवाब- सौरभ भारद्वाज

AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह बहुत बड़ी जीत है। भाजपा को बहुत बड़ा जवाब है। अदालत ने साफ कहा कि CBI ने षड्यंत्र के तहत आरोप बनाए और पात्रों को जोड़ा। अब CBI अफसरों की जांच होगी। केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने भी बरी होने पर प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया पर लिखा, “इस संसार में कोई कितना भी शक्तिशाली हो जाए, शिव शक्ति से ऊपर नहीं हो सकता। सच की हमेशा जीत होती है।”

ईमानदारी की जीत

इस फैसले के बाद दिल्ली AAP कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है। बरी होने के साथ ही पार्टी नेताओं ने दावा किया कि यह फैसला आम आदमी पार्टी और देश में ईमानदारी की जीत है। अदालत के इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक षड्यंत्र के तहत लगाए गए आरोपों का न्यायिक निरीक्षण किया गया और बिना ठोस प्रमाण के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। 

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