
Holika Dahan Tradition: होलिका दहन की परंपरा में गेहूं और चने की हरी बालियां (फलियां या होले) डालने का रिवाज सदियों पुराना है, जो न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि कृषि और प्रकृति से गहरा जुड़ाव भी दर्शाता है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन के दौरान लोग होलिका की पवित्र अग्नि में ये हरी बालियां अर्पित करते हैं, जिसे 'होरहा' या नए अनाज की आहुति के रूप में जाना जाता है।
साल 2026में होलिका दहन 02मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन होलिका की अग्नि में गेहूं की हरी बालियां, चने की फलियां (चना की हरी बालियां), जौ आदि नई फसल के अनाज डालने की प्रथा विशेष रूप से प्रचलित है। यह रिवाज मुख्य रूप से रबी फसल की शुरुआत से जुड़ा हुआ है, क्योंकि फाल्गुन मास में गेहूं, जौ और चने की फसल पकने लगती है और नया अनाज घर-घर पहुंचता है।
होलिका की अग्नि में डालें नए अनाज
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका की अग्नि को अत्यंत पवित्र माना जाता है, जो बुराइयों को भस्म करती है और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। नए अनाज की बालियां अग्नि में डालकर या भूनकर खाने से कई लाभ जुड़े हैं:
1. नए अनाज की पहली कटाई का आभार:यह फसल देवताओं और पूर्वजों को समर्पित करने का प्रतीक है। पहला भाग ईश्वर को अर्पित करने से फसल की रक्षा होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
2. रोग निवारण और स्वास्थ्य लाभ:होलिका की आग में भुनी गई गेहूं की बालियां (या चने की) प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कई ज्योतिषी और पंडितों के अनुसार, इससे शरीर के कई रोग दूर होते हैं और नया अनाज किसी को बीमार न करे, इसीलिए इसे अग्नि में सेंकने की परंपरा है।
3. समृद्धि और शुभता का प्रतीक:कुछ स्थानों पर 7बालियां डालने की मान्यता है, क्योंकि 7अंक शुभ माना जाता है (जैसे सप्ताह के 7दिन, 7फेरे)। इससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
4. कृषि संस्कृति का हिस्सा:होली वसंत ऋतु और नई फसल का उत्सव भी है। हरी बालियां डालना प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आने वाली अच्छी फसल की कामना का प्रतीक है।
परंपरा के अनुसार, बालियां होलिका दहन से 2-3 दिन पहले तोड़कर सुखा ली जाती हैं, फिर अग्नि में अर्पित या भुनी जाती हैं। भुने हुए दाने प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं। कई क्षेत्रों में चने की हरी फलियां भी इसी तरह डाली जाती हैं, जो समृद्धि और उर्वरता का संकेत देती हैं।
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