दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान, अपराधों पर अब जेल नहीं...मिलेगी नई सजा

दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान, अपराधों पर अब जेल नहीं...मिलेगी नई सजा

Delhi Government: दिल्ली सरकार ने छोटे अपराधों के लिए सजा की व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। पहली बार छोटे अपराध करने वालों को जेल की सजा के बजाय सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) का दंड दिया जाएगा। इस फैसले को न्यायिक सुधार न्याय प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने 21 जून 2025 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की जिसमें 12 प्रकार की सामुदायिक सेवाओं को शामिल किया गया है।
 
नई सजा का स्वरूप
इस नई व्यवस्था के तहत पहली बार छोटे अपराध जैसे आत्महत्या का प्रयास (धारा 226), छोटी चोरी (5,000 रुपये तक, धारा 303(2)), सार्वजनिक स्थान पर शराब पीकर उपद्रव (धारा 355), और मानहानि (धारा 356(2)) करने वालों को अस्पतालों, सड़कों, और पार्कों की सफाई जैसी सामुदायिक सेवाएं करनी होंगी। यह सजा भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 4(एफ) के तहत दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह सजा वैकल्पिक होगी, यानी अदालतें जेल या जुर्माने के बजाय इसे चुन सकती हैं।
 
दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर फैसला
दिल्ली सरकार के इस कदम की प्रेरणा दिल्ली उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों से मिली है। कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह की सजा का उद्देश्य अदालतों के विवेकाधिकार को सीमित करना नहीं बल्कि अपराधियों के पुनर्वास और समाज के लिए उनके योगदान को बढ़ावा देना है। गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह कदम न केवल जेलों में भीड़ को कम करेगा। बल्कि अपराधियों को समाज में सकारात्मक योगदान देने का मौका भी देगा।
 
समाज और अपराधी दोनों को फायदा
जानकारों का मानना है कि यह पहल छोटे अपराधियों को जेल के कठोर माहौल से बचाएगी जहां वे अक्सर कट्टर अपराधियों के संपर्क में आकर और गंभीर अपराधों की ओर बढ़ सकते हैं। सामुदायिक सेवा से अपराधी न केवल अपनी गलती का प्रायश्चित कर सकेंगे। बल्कि समाज को भी स्वच्छ और बेहतर बनाने में योगदान देंगे। दिल्ली सरकार का दावा है कि यह सुधार जेल प्रणाली पर बोझ को कम करने के साथ-साथ अपराध दर को भी नियंत्रित करेगा।
 
लागू होने की तारीख और आरे की योजनाएं
यह नई व्यवस्था जुलाई 2025 से लागू होगी। दिल्ली सरकार ने इसके लिए प्रशिक्षण और निगरानी तंत्र तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही सामुदायिक सेवा की निगरानी के लिए विशेष समितियां गठित की जाएंगी। जो यह सुनिश्चित करेंगी कि सजा का पालन ठीक ढंग से हो। भविष्य में इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

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