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बिहार में जमीन अधिग्रहण में देरी नहीं होगी बर्दाश्त, 349 परियोजनाओं की होगी सख्त निगरानी

बिहार में जमीन अधिग्रहण में देरी नहीं होगी बर्दाश्त, 349 परियोजनाओं की होगी सख्त निगरानी

Bihar Land Acquisition Project: बिहार में सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और अन्य बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री Dilip Kumar Jaiswal ने स्पष्ट कहा है कि अब जमीन अधिग्रहण से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके लिए सभी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। गुरुवार को विभागीय अधिकारियों के साथ हुई प्रमंडलवार समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि राज्य में चल रही 349 विकास परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाएगी। सभी परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने के लिए एमआईएस (MIS) आधारित ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत बनाया जाएगा। साथ ही लंबित मामलों के त्वरित समाधान के निर्देश भी दिए गए हैं।

45,748 एकड़ भूमि का अधिग्रहण

मंत्री ने बताया कि बिहार में अब तक 349 परियोजनाओं के लिए कुल 45,748 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। इन परियोजनाओं से प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों को मुआवजे के रूप में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के विकास की गति इस बात पर निर्भर करती है कि वहां भूमि अधिग्रहण का कार्य कितनी तेजी और पारदर्शिता से पूरा होता है।

प्रमंडल में 91 परियोजनाओं शामिल

प्रमंडलवार आंकड़ों के अनुसार पटना प्रमंडल में 66 परियोजनाओं के लिए 8,023 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई, जिसके बदले 9,502 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। तिरहुत प्रमंडल में 91 परियोजनाओं के लिए 12,540 एकड़ भूमि के बदले 6,692 करोड़ रुपये दिए गए। पूर्णिया प्रमंडल में 46 परियोजनाओं के लिए 3,517 करोड़ रुपये जारी किए गए। इसके अलावा मगध प्रमंडल में 3,534 करोड़ रुपये, सारण में 1,782 करोड़ रुपये, दरभंगा में 1,685 करोड़ रुपये, मुंगेर में 1,409 करोड़ रुपये, भागलपुर में 1,049 करोड़ रुपये और कोसी प्रमंडल में 915 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

हर महीने समीक्षा बैठक आयोजित

मंत्री ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को हर महीने समीक्षा बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है। वहीं जिला भू-अर्जन अधिकारियों को परियोजनाओं की प्रगति सार्वजनिक करने और एमआईएस पोर्टल पर नियमित रूप से जानकारी अपडेट करने को कहा गया है। सरकार ने साफ किया है कि अब राज्य मुख्यालय से सभी परियोजनाओं की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। यदि किसी परियोजना में देरी, आंकड़ों में गड़बड़ी या लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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