10 साल...50 हजार मजदूर....369 ऊंची शिव प्रतिमा का आज से लोकार्पण शुरू, जानें खासियत

10 साल...50 हजार मजदूर....369 ऊंची शिव प्रतिमा का आज से लोकार्पण शुरू, जानें खासियत

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा तैयार हो गई है आज उसका लोकार्पण किया जाएंगा। शिव प्रतिमा के स्थान की बात करें तो यह राजस्थान में बनाई गई है और यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाई गई है। राजस्थान में राजसमंद जिले के नाथद्वारा में बनी शिव प्रतिमा की ऊंचाई 369 फीट है, जिसे विश्वास स्वरूपम नाम दिया गया है।

10 साल में प्रतिमा बनकर हुई तैयार

आपको बता दें कि दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा बनाने के लिए 10 साल का समय लगा है। वहीं इसे दुनिया की टॉप 5 ऊंची प्रतिमाओं में शामिल किया गया है। शिव प्रतिमा इसे संत कृपा सनातन संस्थान द्वारा तैयार की गई है। इस शिव प्रतिमा का लोकार्पण समारोह 29 अक्टूबर से शुरू होकर 6 नवंबर तक चलेगा और इसकी शुरूआत मुरारी बापू की राम कथा से होगी। नाथद्वारा की गणेश टेकरी पर बनी यह प्रतिमा 51 बीघा की पहाड़ी पर बनी है। इस प्रतिमा में भगवान शिव ध्यान एवं अल्लड़ की मुद्रा में विराजित हैं। प्रतिमा की ऊंचाई इतनी है कि जो कई किलोमीटर दूर से ही नजर आने लग जाती हैं। रात में भी यह प्रतिमा स्पष्ट रूप से दिखाई दे, इसके लिए विशेष लाइट्स की व्यवस्था भी की गई है।

शिव प्रतिमा बनाने की असली वजह

दरअसल गणेश टेकरी पर भगवान शिव की प्रतिमा बनाने के पीछे एक रोचक कहानी है। कहा जा रहा है कि शिवजी भगवान श्रीनाथजी से मिलने नाथद्वारा आए थे और उन्होंने अरावली पर्वत की इस पर्वतमाला पर उनका इंतजार किया, जिसे गणेश टेकरी कहा जाता है। इसलिए शिवजी की प्रतिमा का निर्माण गणेश टेकरी पर कराए जाना तय किया गया। पूर्व मेंं शिव प्रतिमा की ऊंचाई 251 फीट रखा जाना था लेकिन बाद में इसे 369 फीट तक ऊंचा बनाया गया।

बता दें कि  इस शिव प्रतिमा को बनाने में 50 हजार से ज्यादा मजदूर ने काम किया है। वहीं प्रतिमा में लिफ्ट, सीढ़ियां, हॉल आदि भी बनाए गए हैं। निर्माण के दौरान 3000 टन स्टील और लोहा, 2.5 लाख क्यूबिक टन कंक्रीट और रेत का इस्तेमाल हुआ है। 250 किमी रफ्तार से चलने वाली हवाएं भी मूर्ति को प्रभावित नहीं करेगी। स्टैच्यू ऑफ बिलीफ' की कल्पना मिराज ग्रुप, उदयपुर के चेयरमैन श्री मदन पालीवाल ने की थी। इस अवधारणा को आगे स्टूडियो माटुराम आर्ट द्वारा विकसित किया गया था जिसने 351 फीट ऊंची मूर्ति को डिजाइन किया था, जबकि संरचनात्मक डिजाइन स्केलेटन कंसल्टेंट्स द्वारा प्रदान किया गया था और काम साल 2016 की शुरुआत में शुरू हुआ था।

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