इस देश में शादी के लिए सीमित है उम्र, नहीं करने पर खंभे से बांधकर निभाई जाती है अनोखी रस्म

इस देश में शादी के लिए सीमित है उम्र, नहीं करने पर खंभे से बांधकर निभाई जाती है अनोखी रस्म

He is bathed with spices for not getting married: शादी एक पवित्र बंधन है जो एक परिवार को पूरे परिवार से जोड़ता है। इसमें रीति-रिवाजों से दो परिवार एक नए रिश्ते में बंध जाते है। सभी धर्म के लोग अपनी-अपनी रीति-रिवाजों से शादी करते है। आमतौर पर शादी में सबसे पहले संगीत होता है फिर हल्दी की रस्म, मेंहदी और फिर फेरों का दिन होता है। वैसे तो सभी रस्मों बहुत महत्वपूर्ण होती है लेकिन इसमें हल्दी की रस्म में काफी अहम माना जाता है। कहा जाता है कि हल्दी से बुरी एक्टिविटिज दूल्हा-दुल्हन से दूर रहती है और शायद यहीं वजह है कि हल्दी की रस्म के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर से बाहर नहीं निकलने देते है।

शादी ना करने पर मसालों से जाता है नहलाया

वहीं शादी की उम्र की बाद करे तो वैसे तो आज के समय में शादी की कोई उम्र नहीं है लेकिन वैसे लड़की की उम्र 21 और लड़के की उम्र 23 साल में शादी की जा सकती है। लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश है यहां 25 साल से पहले शादी करनी जरूरी है अगर शादी नहीं की तो उन लोगों के साथ एक परंपरा निभाई जाती है फिर चाहे वो लड़की हो या लड़का। दरअसल शादी ना करने पर उनको मसालों से नहलाया जाता है और वीडियो-फोटोज भी खींचे जाते है। अब आप सोच रहे होंगे कि क्या सच में होता है तो जी हां ये परंपरा निभाई जाती है। तो चलिए आज हम आपको उस देश के बारे में बताते है और ये परंपरा क्यों निभाई जाती है इसकी वजह भी बताते है।

सालों से चली आ रही है ये परंपरा

दरअसल डेनमार्क में 25की उम्र तक शादी कर ली जाती है और अगर 25 साल के बाद कोई(लड़का-लड़की) कुंआरा रह जाता है तो उसे दालचीनी पाउडर और अन्य गरम मसालों से नहला देते हैं और ये कोई मजा-मस्ती के तौर पर नहीं किया जाता बल्कि ये परंपरा है। बता दें कि यह परंपरा डेनमार्क में आज भी निभाई जाती है। वैसे तो डेनिश समाज के लोग 25साल की उम्र तक शादी कर ही लेते हैंऔर नहीं करने पर  परंपरा निभाई जाती है।

उम्र बढ़ते पर मसालों की बढ़ जाती है मात्रा

एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेनमार्क की ये परंपरा काफी साल पुरानी है। मान्यता है कि पहले मसाले बेचने वाले सेल्समैन एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा करते थे। ऐसे में उनकी शादी वक्त से नहीं हो पाती थी। जिसके बाद इस परंपरा को शुरू किया गया। वहीं डेनिश सोसाइटी में ऐसे सेल्समैन को पेपर ड्यूड्स (पीबर्सवेन्ड्स) और महिलाओं को पेपर मैडेन्स (पेबर्मो) कहा जाता था फिर उन्हें मसालों से नहलाने का किया जाता था और उस समय से इस प्रथा की शुरुआत हो गई। कहा जाता है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, मसालों की मात्रा भी बढ़ा दी जाती है।

ऐसे निभाते है परंपरा

इस रस्म(परंपरा) के दौरान लोगों को दालचीनी के पाउडर से सिर से पैर तक बड़े तरीके से नहलाया जाता है। इस दौरान लोग होली (Holi) की तरह किसी लॉन या पार्क में जमकर खाते-पीते है। रंगों की जगह गरम मसालों का पाउडर उड़ता है और बाकी कसर पानी से नहलाकर पूरी कर दी जाती है।माना जाता है कि इस प्रथा के बाद अविवाहित युवक-युवतियों को जल्द ही अच्छा लाइफ पार्टनर मिल जाता है।

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