Dengue Virus: भारत में डेंगू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की दो साल तक चली एक देशव्यापी निगरानी रिपोर्ट में सामने आया है कि अब देश के कई हिस्सों में डेंगू वायरस के कई अलग-अलग स्ट्रेन एक साथ फैल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति को हाइपरएंडेमिक ट्रांसमिशन कहा जाता है। इससे गंभीर डेंगू के मामलों का खतरा बढ़ सकता है, संक्रमण का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है और भविष्य में टीकाकरण की रणनीति भी चुनौतीपूर्ण बन सकती है।
समय पर जांच कराना बेहद जरूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेंगू दुनिया में तेजी से फैलने वाली मच्छर जनित बीमारियों में से एक है। भारत में हर साल मानसून और उसके बाद डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। ऐसे में लोगों को सही जानकारी देना, मच्छरों पर नियंत्रण और समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है। डेंगू एडीज (Aedes) मच्छर के काटने से फैलता है। यह बीमारी किसी संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलाने, साथ बैठने, खाना साझा करने या एक ही कमरे में रहने से नहीं फैलती। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कई गलत जानकारियां फैलती रहती हैं, जिन पर लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू को लेकर कई गलत धारणाएं आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं। जैसे कि डेंगू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, घरेलू नुस्खों से गंभीर डेंगू ठीक हो जाता है, बारिश के मौसम में हर बुखार डेंगू ही होता है या फिर डेंगू के टीके सुरक्षित नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी गलतफहमियां मरीजों के इलाज में देरी कर सकती हैं और बीमारी को गंभीर बना सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चिकित्सा विज्ञान ने डेंगू की रोकथाम के लिए कई प्रगति की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ देशों में पात्र लोगों के लिए Qdenga (TAK-003) नामक डेंगू वैक्सीन की सिफारिश की है। हालांकि, इसका इस्तेमाल संबंधित देश की स्वास्थ्य नीति और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू के कुछ लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें लगातार उल्टी होना, पेट में तेज दर्द, नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी या मल में खून दिखना, अत्यधिक कमजोरी, ज्यादा नींद आना, सांस लेने में तकलीफ या बेचैनी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डेंगू से बचाव के लिए क्या करें?
डेंगू से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें, पानी की टंकियों को ढककर रखें, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करें और बुखार आने पर खुद दवा लेने की बजाय डॉक्टर से जांच कराएं। विशेषज्ञों का मानना है कि डेंगू से लड़ाई केवल मच्छरों को खत्म करने से नहीं जीती जा सकती। सही जानकारी फैलाना और अफवाहों पर रोक लगाना भी उतना ही जरूरी है। लोगों को किसी भी स्वास्थ्य संबंधी संदेश को सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करनी चाहिए। जागरूकता, समय पर इलाज और वैज्ञानिक जानकारी ही डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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