Crude Oil Supply: दुनिया के कई देशों में ईंधन संकट की स्थिति बनती दिख रही है। कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। अमेरिका में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों से अपने तेल भंडार का इस्तेमाल करने की अपील की है। वहीं, चीन ने भी ईंधन के निर्यात पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने भी दुनिया भर में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
भारत के लिए है राहत की खबर
इस बीच भारत के लिए सितंबर महीने से राहत की खबर सामने आई है। भारत ने सितंबर में रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल का आयात किया है। खास बात यह है कि इस दौरान खाड़ी देशों से भारत को तेल की सप्लाई में तेजी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में भारत का कच्चे तेल का आयात करीब 5.26 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा।
कई देशों से हो रहा तेल का आयात
Kpler के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान और कतर की हिस्सेदारी करीब 39 प्रतिशत रही। इराक ने भारत को रोजाना करीब 5.25 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा। इसके बाद सऊदी अरब ने 5.17 लाख बैरल और UAE ने 4.38 लाख बैरल प्रतिदिन तेल की सप्लाई की। कुवैत से करीब 3.35 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भारत पहुंचा।
इस देश से खरीदा गया सबसे ज्यादा कच्चा तेल
भारत ने सितंबर में सबसे ज्यादा कच्चा तेल रूस से खरीदा। रूस से करीब 18.72 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का आयात हुआ। वहीं अमेरिका से करीब 1.25 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल भारत ने खरीदा। इसके अलावा वेनेजुएला और नाइजीरिया समेत दूसरे देशों से भी भारत ने तेल आयात किया।
कच्चे तेल की कीमतों पर बना दबाव
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहती हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इसका असर परिवहन लागत के जरिए महंगाई पर भी पड़ सकता है।
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