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रूसी और ईरानी तेल पर छूट खत्म, भारत के सामने नई आपूर्ति चुनौती; बढ़ सकती हैं लागतें

रूसी और ईरानी तेल पर छूट खत्म, भारत के सामने नई आपूर्ति चुनौती; बढ़ सकती हैं लागतें

India US Crude Oil: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल पर दी गई अस्थायी छूट को खत्म करने का फैसला किया है, जिससे भारत समेत कई देशों के लिए नई चुनौती पैदा हो सकती है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को कहा कि अमेरिका अब रूस और ईरान से जुड़े तेल आयात पर दी गई सामान्य छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने बताया कि यह छूट केवल उन कार्गो पर लागू थी जो 11 मार्च से पहले समुद्र में थे। इसके बाद अब यह सुविधा समाप्त कर दी गई है।

भारत की तेल आपूर्ति पर असर

इस फैसले का सीधा असर भारत की तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है, क्योंकि हाल के महीनों में भारत ने छूट का लाभ उठाते हुए रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाया था। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 1.96 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जो पिछले नौ महीनों में सबसे अधिक स्तर था।

रूसी और ईरानी तेल की खरीद हो जाएगी सीमित

अब छूट खत्म होने के बाद भारत की सरकारी तेल कंपनियों के लिए सस्ते रूसी और ईरानी तेल की खरीद सीमित हो जाएगी। इससे आयात लागत बढ़ने की संभावना है और वैश्विक बाजार में दबाव भी बन सकता है। भारत सरकार का कहना है कि वह लंबे समय से ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण पर काम कर रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पहले कहा था कि भारत 40 से अधिक देशों से तेल आयात कर रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 

विशेषज्ञों के अनुसार, अब भारत के लिए विकल्पों में लैटिन अमेरिका प्रमुख भूमिका निभा सकता है। ब्राजील, कोलंबिया, इक्वाडोर और गुयाना जैसे देश तेजी से उभरते हुए तेल आपूर्तिकर्ता बन रहे हैं। इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका के नाइजीरिया और अंगोला भी स्थिर आपूर्ति देने वाले विकल्प माने जा रहे हैं। साथ ही अमेरिका से शेल ऑयल की खरीद भी बढ़ सकती है, जो बड़े पैमाने पर उपलब्ध और भरोसेमंद स्रोत माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कोई भी विकल्प सस्ते रूसी तेल की पूरी तरह भरपाई नहीं कर सकता। ऐसे में भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी रहेगी, लेकिन आयात लागत बढ़ने का असर उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

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