CODE OF CONDUCT: चुनाव आचार संहिता क्यों लागू की जाती है, जानें पहली बार कब लागू हुई थी आचार संहिता

CODE OF CONDUCT: चुनाव आचार संहिता क्यों लागू की जाती है, जानें पहली बार कब लागू हुई थी आचार संहिता

नई दिल्ली: देश में लगातार चुनावों का दौर शुरू हो चुका है। आने वाले दिनों में दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने है। ऐसे में भारत निर्वाचन आयोग चुनाव ने इन राज्यों में आचार संहिता लागू कर दी है। इस दौरान सरकारी मशीनरी एक तरह से चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहती है। मतदान और मतगणना के बाद नतीजों की आधिकारिक घोषणा के साथ ही आचार संहिता हट जाती है। आदर्श चुनाव आचार संहिता क्या है और इसके नियम-कायदे हैं,

आइए जानते है इस बारे में

कब लागू होती है आचार संहिता

देश में आचार सहिता चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही लागू हो जाती है। ऐसे में चुनावी पार्टीयों पर कुछ प्रतिबंध लगा दिए जाते है। ताकि चुनाव के चलते कोई वोट खरीद-बेच न सके है न किसी पर जबरन वोट डलवाने की कोशिश हो सके।

कब तक लागू रहती है आचार सहिंता

बता दें देश में जब भी चुनाव पास आते है तो राजनीतिक पार्टिया हरकत में आ जाती है। ऐसे में वोट खरीद फरोश के लिए लोगों को झांसा दिया जाता है। इसलिए  आचार संहिता चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने तक लागू रहती है। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लगती है और वोटों की गिनती होने तक जारी रहती है।  

पहली बार कब लागू हुई थी आचार संहिता?

पहली बार इसका इस्तेमाल 1960 में केरल के विधानसभा चुनावों में किया गया था। नियमों का एक छोटा सा सेट तैयार करके पार्टियों को निर्देश दिया गया था। उनको बताया गया था कि चुनाव की घोषणा होने के बाद क्या करें और क्या न करें। उसके बाद 1962 में लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में भी इन नियमों को बांटा गया। राज्य सरकारों से आग्रह किया गया कि वे पार्टियों के बीच आचार संहिता को स्वीकार्य बनाए।

वहीं साल 1967 के लोकसभा और राज्य सभा चुनावों में भी आचार संहिता को लागू किया गया। साल 1979 में राजनीतिक पार्टियों से परामर्श के बाद आचार संहिता में एक बदलाव किया गया। सत्ताधारी पार्टी अपनी सत्ता और ताकत का इस्तेमाल करके अनुचित लाभ न उठा ले, इसके लिए एक नया सेक्शन जोड़ा गया। इसके माध्यम से सत्ताधारी पार्टी के लिए कुछ सीमाएं तय की गईं। 1991 में आचार संहिता को मजबूत बनाने के कदम उठाए गए और इसे फिर से जारी किया गया। 1991 में जिस रूप में आचार संहिता को जारी किया गया, वही अब तक चला आ रहा है।

 

आचार संहिता में क्या रोक लगाई जाती है?

आचार संहिता में आठ प्रावधान किए गए हैं जो सामान्य व्यवहार, बैठकों, जुलूस, मतदान दिवस, मतदान केंद्रों, पर्यवेक्षकों, सत्ताधारी पार्टी और चुनाव घोषणापत्र से संबंधित है।

आचार संहिता के नियम क्या हैं?

देश में चुनाव के ऐलान के बाद से ही आचार सहिंता लागू की जाती है। इसमें कई नियम लागू होते है। इनकी अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं कर सकता। सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता को फायदा पहुंचाने

वाले काम के लिए नहीं होगा। सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जाएगा। किसी भी तरह की सरकारी घोषणा, लोकार्पण और शिलान्यास आदि नहीं होगा। किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, राजनेता या समर्थकों को रैली करने से पहले पुलिस से अनुमति लेनी होगी। किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जाएंगे।

 

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