कब से शुरू हो रहा है लोक आस्था का महापर्व छठ, जानें नहाय-खाय और खरना का सही समय

कब से शुरू हो रहा है लोक आस्था का महापर्व छठ, जानें नहाय-खाय और खरना का सही समय

नई दिल्ली: लोक-आस्था के महापर्व छठ को हिंदुओं का प्रमुख त्योहार माना जाता है। यहां पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस बार छठ के पर्व की शुरुआत 28 अक्टूबर से लेकर 31 अक्टूबर मनाया जाएगा। इस पूजा के दिन सूर्यदेव और षष्ठी मैया की पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन शिव भगवान की पूजा भी की जाती है। इस त्यौहार को सबसे ज्यादा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। साथ ही नेपाल में भी ये पर्व मनाया जाता है। इस त्योहार को सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताएं है कि जो कोई छठ पर्व को पूरे विधि-विधान के साथ करता है, उसकी हर मनोकामना सूर्य देव पूरी करते हैं। छठ पूजा में मुख्य रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ-साथ छठी मैया की पूजा होती है। इस साल छठ पूजा की मुख्य तिथि 30 और 31 अक्टूबर को है। दरअसल 30 अक्टूबर को संध्याकालीन अर्घ्य है, जबकि 31 अक्टूबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं यहां व्रत संतान के लिए रखा जाता है। जिसमें 36 घंटे तक निर्जला व्रत होता है।

छठ पूजा के व्रत के ये चार दिन

पहला दिन-नहाय खाय

इस दिन छठ पूजा की शुरुवात होती है। जिसे नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत करने से पहले एक बार ही खाना होता है। उसके बाद नदी में स्नान करना होता है। ये सब 28 अक्टूबर को होता है।

दूसरा दिन-खरना

छठ का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इस दिन सूर्यादय से लेकर सूर्यास्त तक महिलाओं का व्रत रहता है। शाम को सूर्यास्त के तुरंत बाद व्रत खोला जाता है। उसके बाद भोजन तैयार किया जाता है। उसके बाद भोग सूर्य को अर्पित किया जाता है। व्रत का तीसरा दिन दूसरे दिन के प्रसाद के ठीक बाद शुरू होता है। खरना 29 अक्टूबर को है। 

तीसरादिन- अर्घ्य

छठ का तीसरा दिन सबसे प्रमुख दिन होता है। इस दिन शाम के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस दिन बांस की टोकरी में फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू के साथ ओर भी कई चीजों रख कर अर्घ्य के टोकरी को सजाया जाता है। इसके बाद, व्रत रखने वाली महिला और उसका पूरा परिवार मिलकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते है। बता दें इस दिन डूबते सूर्य की आराधना की जाती है। पहला अर्घ्य 30 अक्टूबर को होता है। इस दिन सूर्यास्त का शाम सुबह 05बजकर 37 मिनट रहेगा।

चौथा दिन-उषाअर्घ्य

इस दिन अर्घ्य उगते हुए सूरज को दिया जाता है। इसे उषा अर्घ्य कहा जाता है। 36 घंटे के व्रत के बाद अर्घ्य दिया जाता है। 31 अक्टूबर को छठ का आखिरा दिन होता है। इस दिन सूर्योदय का समय 06 बजकर 31 मिनट का है।

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