ढलते सूर्य को इस तरह दिया जाता है अर्घ्य, जानें क्या है पूजा की विधि

ढलते सूर्य को इस तरह दिया जाता है अर्घ्य, जानें क्या है पूजा की विधि

नई दिल्ली: छठ पूजा के तीसरे दिन यानी आद 30 अक्टूबर के शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। हिंदू मान्यताऔं के मुताबिक,छठ पूजा का संध्या अर्घ्य कार्तिक माह की शुक्ल षष्ठी को दिया जाता है। इसके लिए छठ व्रती सूर्यास्त से पहले छठ घाट पर पहुंचते है। जहां जल में खड़े होकर सूर्यास्त की प्रतीक्षा करते हैं. शाम के समय जब सूर्यास्त होने लगता है तो छठ व्रती सूर्य देव को पहला अर्घ्य देते है। ऐसे में जानते हैं कि आज सूर्यास्त का समय क्या है और किस समय सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाएगा।

छठ पूजा के चार दिन

इस वर्ष छठ उत्सव 28 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ था, जहां भक्त गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाते है। इसके बाद 29 अक्टूबर को खरना या लोहंडा में डूबकी लगाते है,जहां एक दिन का निर्जला उपवास रखा जाता है। भक्तों के लिए सूर्यास्त और सूर्योदय का समय खास महत्व रखता है। पंचांग के अनुसार, इस साल छठ पर्व का संध्या अर्घ्य 30 अक्टूबर को यानी आज दिया जाएगा।

संध्या अर्घ्य की तिथि और समय

इस बार 30 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। संध्या अर्घ्य के दिन सूर्यास्त का समय शाम लगभग 5:37 बजे होगा, जिसके दौरान भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

छठ पूजे के तीसरे दिन का महत्व

आज छठ महापर्व का तीसरा दिन है। आज के दिन छठी मैया की पूजा के लिए प्रसाद बनाया जाता है और शाम को सूर्यास्त के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। वहीं अर्घ्य देने के लिए पहले सांय काल में बांस की टोकरी में छठ पूजा में शामिल सभी पूजा सामग्री, फल और पकवान को अर्घ्य के सूप में सजाया जाता है। इससी के साथ छठ के प्रसाद से भरे हुए सूप से छठी मइया की पूजा की जाएगी है।

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