Chaturmas: अगले 4 महीने सृष्टि का संचालन करेंगे महादेव, रखें इन बातों का ध्यान

Chaturmas: अगले 4 महीने सृष्टि का संचालन करेंगे महादेव, रखें इन बातों का ध्यान

नई दिल्लीआज से आषाढ़ मास शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि शुरु हो रही है। इसे देवशयनी या हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है। माना जाता है किआज देवशयनी एकादशी से अगले 4 महीनों तक भगवान विष्णु पाताल लोक में विश्राम करते हैं। इस दौरान सृष्टि का संचालन महादेव संभालते हैं। धर्म ग्रंथों में इन 4 महीनों से संबंधित अनेक नियम बनाए गए हैं। इस दौरान लोगों को खान-पान से संबंधित विशेष सावधानी भी बरतने की सलाह दी जाती है। साथ ही इस समय धार्मिक गतिविधियां भी तेज हो जाती है। कुल मिलाकर कहा जाए तो चातुर्मास के 4 महीने आत्म सयंम रखने और त्योहारों का आनंद लेने के लिए बनाए गए हैं।

कब से कब तक रहेगा चातुर्मास

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार चातुर्मास का आरंभ 10 जुलाई, रविवार से हो रहा है जो 4 नवंबर तक रहेगा। 4 नवंबर को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी। इसे देवप्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। प्रबोधन का अर्थ है जागना यानी इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने की निद्रा के बाद जागते हैं और सृष्टि का संचालन पुन: अपने हाथ में ले लेते हैं। इस दिन घर-घर में भगवान विष्णु के जागने का उत्सव मनाया जाता है।

रविवार से भगवान जाएंगे शयन में

आचार्य एवं पंडितों का कहना है कि एकादशी तिथि का आगमन शनिवार को दिन में 11 बजकर 23 मिनट पर हो रहा है। यह अगले दिन रविवार की सुबह 9:31 बजे तक विद्यमान रहेगा। अतः उद्याव्यापिन तिथि में होने के कारण एकादशी स्नान-व्रत का मान रविवार का हो रहा है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व है। वैसे तो हिंदी मास में हर महीने में दो बार एकादशी तिथि पड़ती है, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। जिसमें धर्मानुरागी पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं।

देवोत्थान एकादशी के बाद अब होंगे मांगलिक कार्य

आचार्य अमरेंद्र कुमार शास्त्री ने बताया की इस महीने की शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी की तिथि से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जायेंगे, जो चार महीने बाद कार्तिक मास की देवोत्थान एकादशी के दिन उठेंगे। शास्त्रों में इन चार महीनों में शादी-विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाने की बाध्यता है। अतः सभी मांगलिक कार्य अब चार नवंबर (देवोत्थान एकादशी) के बाद ही होंगे।

Leave a comment