चंद्र ग्रहण के समय समुद्र क्यों मारता है हिलकोरे, जानें इसके पीछे की वजह

चंद्र ग्रहण के समय समुद्र क्यों मारता है हिलकोरे, जानें इसके पीछे की वजह

नई दिल्ली: इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहणआज है यानी 8 नवंबर को है। चंद्र ग्रहण का मतलब पृथ्वी पर कुछ देर चंद्रमा की रोशनी नहीं पहुंचेगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच में आ जाता है जिससे सूर्य की रौशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती है और इस पर काला छाया बन जाता है। वैसे तो चंद्र ग्रहण को सूर्य ग्रहण जितना हानिकारक नहीं माना जाता है। लेकिन लोगों में चंद्र ग्रहण को लेकर कई तरह का अंधविश्वास है। माना जाता है कि ग्रहण के दौरान खाना या सोना नहीं चाहिए। इसके कारण को जानने के लिए आज हम आपकों चंद्र ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक काल में कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए,लेकिन क्या आपको मालूम है कि चंद्र ग्रहण से समुद्र में कैसे लहरें आती हैं?

चंद्रमा पृथ्वी के पानी को अपनी ओर खीचता है।

यही सबसे बड़ा कारण है कि चंद्रमा लगातार पृथ्वी के पानी को अपनी ओर खींचता रहता है, जिससे समुद्र में बड़ी-बड़ी लहरें उठती रहती हैं। धरती और सूरज के बीच गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी-चंद्रमा के बीच के गुरुत्वाकर्षण से 177 गुना ज्यादा है। लेकिन चूंकि सूरज, चंद्रमा की तुलना में पृथ्वी से 390 गुना ज्यादा दूरी पर है, इसलिए चंद्रमा समुद्र की लहरों को अधिक नियंत्रित करता है। बता दें कि धरती से चंद्रमा की दूरी 384,400 किमी है, जबकि सूर्य की दूरी 148.23 मीलियन किलोमीटर है।

नजदीक और दूरी के बीच का अंतर

इसके साथ ही यह नजदीक और दूरी के बीच का अंतर भी है जो लहरें बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुरुत्वाकर्षण ही खिंचाव की पूर्ण शक्ति नहीं, क्योंकि सूर्य के अधिक गुरुत्वाकर्षण बावजूद चंद्रमा धरती पर ज्यादा प्रभाव डालता है। समुद्र की लहरों पर सूरज का प्रभाव चंद्रमा के प्रभाव का 44 प्रतिशत है, यानी यह आधे से थोड़ा कम है।जब चंद्रमा धरती के एक तरफ होता है, तो यह समुद्र के पानी को तेजी से अपनी तरफ खींचता है, जिससे उंची-उंची लहरें आती हैं। चूंकि धरती अपनी धुरी पर घूमती है, इसलिए चंद्रमा हर 24 घंटे 50 मिनट में धरती की एक परिक्रमा पूरी करता है।

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