Maharashtra SIR: गुरुवार, 24 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट में महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देते हुए दो रिट याचिकाएं दायर की गईं। इन याचिकाओं में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) को कई निर्देश देने की मांग की गई है, जिनमें मतदाता सूची निर्धारण (एसआईआर) से संबंधित 14 निर्णयों को रिकॉर्ड पर रखना , मतदान केंद्रों के युक्तिकरण के मानदंड और ईसीआईएनईटी के विनिर्देश शामिल हैं। इनमें महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हटाए गए प्रत्येक मतदाता को बहाल करने, राज्य के लिए एसआईआर निर्देशों को रद्द करने और आगामी विधानसभा चुनावों पर तब तक रोक लगाने की भी मांग की गई है जब तक कि मतदाता सूची को "कानूनी रूप से अनुपालन" योग्य नहीं बना दिया जाता। एक याचिका में वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किए गए डेटा विलोपन और सॉफ्टवेयर अवरोधों की जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक समिति की नियुक्ति की मांग की गई है।
मौलिक अधिकार प्रभावित
कोल्हापुर सर्किट बेंच के समक्ष अधिवक्ता असीम सरोडे के माध्यम से महाराष्ट्र के चार निवासियों और पंजीकृत मतदाताओं द्वारा दायर एक रिट याचिका में एक्सप्रेस की जांच का हवाला दिया गया और दावा किया गया कि वे "मतदाता सूचियों के प्रबंधन को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक मानदंडों के व्यवस्थित क्षरण से पीड़ित" थे, जो उनके अनुसार सीधे उनके मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है।
सोमवार को सुनवाई होने की संभावना
याचिका में यह भी दावा किया गया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के "विपरीत" थी, और आरोप लगाया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और कार्यकारी आयुक्त ने अपनी शक्तियों का प्रयोग "लोकतांत्रिक दृष्टिकोण के लिए हानिकारक और आम जनता के हित के खिलाफ" तरीके से किया था। चारों याचिकाकर्ताओं ने 14 "एकतरफा प्रशासनिक आदेशों" और संशोधनों को रद्द करने, दर्ज असहमति का खुलासा करने, सभी हटाए गए मतदाताओं को बहाल करने और हटाए जाने की जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक समिति के गठन की मांग की है।
याचिका में की गई मांग
याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि देश भर में आगामी सभी विधानसभा चुनावों को "तब तक स्थगित कर दिया जाए जब तक कि नई, त्रुटिरहित और कानूनी रूप से अनुपालन करने वाली मतदाता सूचियों को मंजूरी नहीं मिल जाती"। मुंबई के दो निवासियों द्वारा अधिवक्ता हितेंद्र गांधी के माध्यम से दायर एक अन्य रिट याचिका में "गणना के दौरान दस्तावेजों के संग्रह और अप्राप्य स्थिति के आधार पर बहिष्करण" पर चिंता व्यक्त की गई है। मुंबई के दो निवासियों द्वारा अधिवक्ता हितेंद्र गांधी के माध्यम से दायर एक अन्य रिट याचिका में "गणना के दौरान दस्तावेजों के संग्रह और अप्राप्य स्थिति के आधार पर बहिष्करण" पर चिंता व्यक्त की गई है।
कई अन्य राहतो की भी मांग
याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की है कि वे एसआईआर के कारणों, अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट (एएसडीडी) मतदाता सूचियों के लिए उपयोग की गई कार्यप्रणाली और ईसीआईएनईटी विनिर्देशों को प्रकाशित करें। उन्होंने अधिकारियों को अप्रैल 2026 में दिए गए अपने अभ्यावेदन पर कार्रवाई करने और महाराष्ट्र के लिए एसआईआर से संबंधित निर्देशों को रद्द करने की भी मांग की है। याचिका में आगे यह निर्देश देने की मांग की गई है कि किसी भी मतदाता को वैधानिक नोटिस, सुनवाई का अवसर और तर्कसंगत आदेश के बिना मतदान से बाहर न किया जाए, साथ ही अन्य राहतें भी मांगी गई हैं।
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