बिहार-झारखंड में CBI की बड़ी कार्रवाई, इन 7 जगहों पर छापे, GST रिफंड घोटाले में बड़ा खुलासा

Bihar-Jharkhand News: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बिहार और झारखंड में 100 करोड़ रुपये के फर्जी GST रिफंड घोटाले का पर्दाफाश कर सात स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई फर्जी निर्यात बिलों के जरिए टैक्स रिफंड हासिल करने के मामले में की गई। जिसमें पटना के तत्कालीन अतिरिक्त सीमा शुल्क आयुक्त रणविजय कुमार सहित पांच सीमा शुल्क अधिकारी और 30 अन्य लोग मुख्य आरोपी हैं।
बरामद हुए सोने के बिस्किट और दस्तावेज
CBI ने पटना (दो स्थान), पूर्णिया (दो स्थान), जमशेदपुर, नालंदा और मुंगेर में छापेमारी की। इस दौरान 100 ग्राम के सात सोने के बिस्किट, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में पता चला कि जयनगर, भीमनगर और भिट्टामोर जैसे बिहार-नेपाल सीमा पर स्थित लैंड कस्टम स्टेशनों (LCS) से टाइल्स और ऑटोमोबाइल पार्ट्स के फर्जी निर्यात दिखाकर GST रिफंड लिया गया। CBI के अनुसार फर्जी निर्यात बिलों की राशि 800 करोड़ रुपये थी। जिसके आधार पर 100 करोड़ रुपये का रिफंड हासिल किया गया।
कैसे हुआ घोटाला?
CBI की FIR के अनुसार चार सीमा शुल्क अधीक्षक जयनगर में नीरज कुमार और मनमोहन शर्मा और भीमनगर में तरुण कुमार सिन्हा और राजीव रंजन सिन्हा ने अतिरिक्त आयुक्त रणविजय कुमार के साथ मिलकर यह घोटाला अंजाम दिया। इन अधिकारियों ने कोलकाता के एक क्लीयरिंग एजेंट गंगा सिंह के साथ मिलकर लगभग 10 लाख रुपये का फर्जी बिल बनाए। जो अधीक्षकों के क्लीयरेंस की सीमा में आते थे। साथ ही जांच में यह भी सामने आया कि कई फर्में अपने पंजीकृत पते पर संचालित नहीं थीं।
आरोपियों पर शिकंजा
CBI ने शनिवार को रणविजय कुमार से जमशेदपुर में उनके सरकारी आवास पर छह घंटे तक पूछताछ की हालांकि अभी उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। खबरों के मुताबिक कुछ आरोपी फरार हैं। और उनकी तलाश जारी है। CBI का मानना है कि इस घोटाले का नेटवर्क बिहार-झारखंड तक सीमित नहीं हो सकता और अन्य राज्यों से भी इसके तार जुड़े हो सकते हैं। इस घोटाले ने सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई है। CBI अब इस नेटवर्क की गहराई तक जांच कर रही है, जिसमें और गिरफ्तारियां संभव हैं। यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ CBI की सख्ती को दर्शाती है।
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