Budget Session:सांसद के सस्पेंड होने पर छिन जाते हैं ये सारे अधिकार! अगर नहीं जानते हैं तो जान लीजिए

Budget Session:सांसद के सस्पेंड होने पर छिन जाते हैं ये सारे अधिकार! अगर नहीं जानते हैं तो जान लीजिए

MPs Suspension: संसद का बजट सत्र हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। 2 फरवरी और 3 फरवरी को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में तिखी नोकझोक हुई। राहुल गांधी पूर्व सेनाध्यक्ष की किताब पर अपनी बात रखना चाहते थे, वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि जब किताब प्रकाशित ही नहीं हुई तो, उसका जिक्र कैसे किया जा सकता है।

वहीं, मंगलवार यानी 3 फरवरी को विपक्ष के 8 सांसदों ने सभापति पर कागज उछाला। जिसके कारण 8 सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया। जिन सांसदों को सस्पेंड किया गया उनमें कांग्रेस के मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, अमरिंदर राजा वड़िंग, हिबी ईडन, किरन रेड्डी, प्रशांत पोडोले, एस.वेंकटेशन और डी कोरियाकोस शामिल हैं। इन्हें पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया है।

सस्पेंड होने पर छिन जाते हैं ये अधिकार

लोकसभा के सांसदों के सस्पेंड होने पर सिर्फ उन्हें सत्र में भाग लेने से रोका जाता बल्कि कई अधिकार भी छिन जाते हैं। निलंबित सांसद सदन में जनहित के मुद्दों को नहीं उठा सकते हैं। कानून और पॉलिसी पर होने वाली बहस में वो हिस्सा नहीं ले सकते हैं। निलंबन उनकी विपक्ष की भूमिका को कमजोर करने का काम करता है यानी वो सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं बन पाते हैं। इस तरह से निलंबन को संघीय ढांचे के लिए खतरा माना जाता है। निलंबन के दौरान सांसद लोकसभा या राज्यसभा के कक्ष में प्रवेश नहीं कर सकते हैं।

कौसे खत्म होता है निलंबन? 

अब सवाल है कि सासंदों का निलंबन कैसे खत्म होता है। आमतौर पर निलंबन उस दिन के लिए होता या फिर पूरे सत्र के लिए होता। पूरे सत्र के लिए सांसदों को तब सस्पेंड किया जाता है, जब सभापति को सांसद का व्यवहार अनुचित लगता है। इस तरह से सत्र खत्म होने पर सांसद का निलंबन अपने आप खत्म हो जाता है। वहीं, अगर उसी सत्र में निलंबन को खत्म करना है तो उसके लिए सदन द्वारा प्रस्ताव पारित होता है और अध्यक्ष या सभापति उसे हरी झंडी देते हैं। इस तरह से सांसद का निलंबन खत्म हो जाता है और वो सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते हैं।             

Leave a comment