Brazil Election 2026: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल कर चौथी बार देश की सत्ता में वापसी की है। 25 अक्टूबर को हुए दूसरे दौर के मतदान में लूला ने दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया। जीत के बाद अपने संबोधन में लूला ने ब्राजील की संप्रभुता, लोकतंत्र और चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ब्राजील किसी का बैकयार्ड नहीं है।
जीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लूला ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों को यह समझाने में सफल रही कि ब्राजील में लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी हस्तक्षेप की कोशिशों का मुकाबला किया गया। लूला ने कहा कि उनकी सरकार देश को चलाने के तरीके में बदलाव लाने और आम लोगों की निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संवाद और उनकी भूमिका को लेकर नियमन की जरूरत पर भी जोर दिया।
कड़े मुकाबले में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा दौर रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को हुआ। चुनाव में लूला का मुकाबला पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के बेटे और दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो से था। पहले दौर में फ्लावियो को बढ़त मिली थी, लेकिन दूसरे दौर में लूला ने वापसी करते हुए जीत दर्ज की। चुनाव के शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 99.81 प्रतिशत मतों की गिनती तक लूला को 51.76 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो के खाते में 48.24 प्रतिशत वोट आए। इस जीत के साथ लूला ब्राजील के राष्ट्रपति के रूप में अपना चौथा कार्यकाल शुरू करेंगे।
लैटिन अमेरिकी नेताओं ने दी बधाई
लूला की जीत के बाद लैटिन अमेरिका के कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी। मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने ब्राजील के लोगों की जीत और लोकतंत्र का उल्लेख करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। वहीं, बोलिविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने ब्राजील और बोलिविया के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग मजबूत करने और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की बात कही। पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने भी लूला को बधाई देते हुए दोनों देशों के बीच विकास और क्षेत्रीय सहयोग के साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
महंगाई, अपराध और भ्रष्टाचार रहे चुनाव के प्रमुख मुद्दे
ब्राजील का यह चुनाव जीवन-यापन की बढ़ती लागत, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के बीच हुआ। लूला ने लोकतंत्र, सामाजिक कल्याण और देश की स्वतंत्र विदेश नीति को अपने अभियान में प्रमुखता दी। दूसरी ओर, फ्लावियो बोल्सोनारो ने अपराध पर सख्त रुख अपनाने और खाद्य पदार्थों की कीमतों को कम करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया।
दोनों राजनीतिक खेमों पर परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप भी चुनावी चर्चा का हिस्सा रहे। लूला को पहले भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जेल जाना पड़ा था, लेकिन बाद में उनकी दोषसिद्धि रद्द कर दी गई थी।
ब्राजील की विदेश नीति पर भी पड़ेगा असर
लूला की जीत का प्रभाव ब्राजील की घरेलू राजनीति के साथ उसकी विदेश नीति पर भी पड़ सकता है। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान देश की संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार पर जोर दिया। साथ ही, ग्लोबल साउथ और चीन समेत अन्य देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की नीति का समर्थन किया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ व्यापार और राजनीतिक मुद्दों पर तनाव के बीच लूला की जीत को ब्राजील की स्वतंत्र विदेश नीति के जारी रहने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, देश की आर्थिक चुनौतियों और राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच नई सरकार के सामने कई अहम सवाल बने रहेंगे।
यूनियन लीडर से राष्ट्रपति तक का सफर
लूला ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1970 के दशक में मजदूर संघ के नेता के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने वर्कर्स पार्टी (PT) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई चुनावी प्रयासों के बाद उन्होंने 2002 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव जीता और 2006 में दोबारा सत्ता में लौटे।
2010 में उनके बाद डिल्मा रूसेफ राष्ट्रपति बनीं। इसके बाद लूला ने 2023 में फिर से राष्ट्रपति पद संभाला। अब 2026 के चुनाव में जीत के साथ वह चौथी बार राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी निभाने जा रहे हैं। उनका नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होने वाला है।