US vs Iran:अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए सिरे से सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है। इसके बाद तेहरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो उसे कहीं ज्यादा बड़े जवाब का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
ट्रंप ने दी नए हमले की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका रविवार को भी हमला कर सकता है, हालांकि दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते को लेकर उम्मीद जताई, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि क्या तेहरान किसी संभावित समझौते की शर्तों का पालन करेगा। उनके इस बयान से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान ने कहा- हमला हुआ तो कई गुना बड़ा होगा जवाब
अमेरिकी धमकियों के बीच ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह किसी भी नए सैन्य टकराव के लिए तैयार है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने कहा कि अगर दुश्मन सीमित सैन्य कार्रवाई भी करता है, तो ईरान का जवाब कई गुना अधिक प्रभावी होगा।
ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों को फारस की खाड़ी में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की चेतावनी भी दी है। तेहरान का यह रुख दिखाता है कि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव का खतरा अभी टला नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों बढ़ी दुनिया की चिंता?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस की ढुलाई के प्रमुख मार्गों में शामिल है।
इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। ईरान पहले भी इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को लेकर सख्त चेतावनी दे चुका है।
मौजूदा हालात में होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा और समुद्री यातायात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
समझौते की उम्मीद के बीच बढ़ा टकराव
सैन्य धमकियों के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को लेकर दोनों पक्षों के रुख में मतभेद बने हुए हैं।
ईरान ने होर्मुज को खोलने के बदले अमेरिकी नाकेबंदी हटाने से जुड़े प्रस्ताव की खबरों को भी खारिज किया है। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वॉशिंगटन और तेहरान बातचीत के जरिए तनाव कम करेंगे या फिर टकराव का रास्ता चुनेंगे। यदि हालात बिगड़ते हैं, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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