BMC Elections: AIMIM की मजबूत बढ़त, 29 में से 12 महानगरपालिकाओं में बनाई जगह

BMC Elections: AIMIM की मजबूत बढ़त, 29 में से 12 महानगरपालिकाओं में बनाई जगह

BMC Elections: महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के हालिया चुनाव नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक बड़ा संकेत दिया है। यह संकेत है ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की लगातार और रणनीतिक मजबूती का। सीमित संसाधनों, कड़े राजनीतिक विरोध और अंदरूनी चुनौतियों के बावजूद AIMIM ने इन चुनावों में कुल 126 सीटें जीतकर यह साबित कर दिया है कि पार्टी अब महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक प्रभावशाली और स्थायी ताकत बन चुकी है।

AIMIM की पकड़ मजबूत

अहम बात ये है कि AIMIM ने राज्य की 29 में से 12 महानगरपालिकाओं में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। ये पार्टी की धीमी लेकिन स्थिर बढ़त की नीति को साफ तौर पर दर्शाता है। AIMIM ने बिना बड़े शोर-शराबे के जमीनी संगठन और स्थानीय मुद्दों के सहारे अपनी पकड़ मजबूत की है। पार्टी का सबसे शानदार प्रदर्शन छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में देखने को मिला। यहां AIMIM ने 33 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की। साल 2015 के चुनावों में पार्टी को यहां 24 सीटें मिली थीं।

कई सीटों पर बनाई अपनी जगह

इस बार 9 सीटों की बढ़त ये दिखाती है कि AIMIM ने न केवल अपना वोट बैंक बढ़ाया है, बल्कि संगठनात्मक रूप से भी खुद को मजबूत किया है। छत्रपति संभाजीनगर अब AIMIM के लिए सिर्फ एक नगर निगम नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर राजनीतिक प्रयोग का केंद्र बनता जा रहा है। अन्य शहरों की बात करें तो मालेगांव में AIMIM ने 21 सीटें, नांदेड़ में 14, अमरावती में 12, धुले में 10 और सोलापुर में 8 सीटें जीती हैं। मुंबई महानगरपालिका (BMC) जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में भी पार्टी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा नागपुर में 6, ठाणे में 5, अकोला में 3, अहिल्यानगर और जालना में 2-2 सीटें AIMIM के खाते में गईं।

विधानसभा और लोकसभा चुनावों में दिख सकता है असर

ये आंकड़े साफ बताते हैं कि AIMIM का प्रभाव अब सिर्फ मराठवाड़ा तक सीमित नहीं रहा है। पार्टी ने विदर्भ, उत्तर महाराष्ट्र और मुंबई महानगर तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में वह राज्य की राजनीति में और बड़ी भूमिका निभा सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि AIMIM इसी तरह संगठित रणनीति के साथ आगे बढ़ती रही, तो आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी उसका असर देखने को मिल सकता है। 

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