मिल गया इंसानों के रहने लायक ग्रह, नहीं होगी किसी चीज की कमी! वैज्ञानिकों ने की खोज

मिल गया इंसानों के रहने लायक ग्रह, नहीं होगी किसी चीज की कमी! वैज्ञानिकों ने की खोज

found habitable planet: धरती हो या फिर अंतरिक्ष...वैज्ञानिक की रिसर्च किसी-ना-किसी चीजों पर जारी रहती है। हाल ही में वैज्ञानिकों की रिसर्च अंतरिक्ष पर चल रही थी। इस बीच वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे ग्रह को खोज निकाला है जिस पर इंसानों का जीवन संभव है। वहीं इस ग्रह की खोज CARMENES टेलिस्कोप से की गई है।

मिल गया इंसानों के रहने लायक ग्रह

दरअसल  वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के बाहर 5200 से ज्यादा ग्रह खोज हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 200 ही इंसानों के रहने लायक हो सकते हैं। इस ग्रहों में एक ग्रह है जो धरती से 31 प्रकाश वर्ष दूर  है। इसके बारे में कहा जा रहा है कि इस पर इंसानों का जीवन संभव है। साथ ही इस ग्रह पर पानी भी पाया गया है। इस ग्रह का नाम Wolf 1069b बताया जा रहा है।

50 वैज्ञानिकों को थी इस ग्रह की खोज

इस ग्रह की खोज दुनिया भर के 50 वैज्ञानिक कर रहे थे। वहीं उन्होंने पुष्टि की है कि यह अपने तारे Wolf 1069 की परिक्रमा कर रहा है। यह खोज इसलिए अहम है, क्योंकि यहां की जमीन पथरीली है। इसका वजन धरती के वजन से 1.26 गुना ज्यादा है और पृथ्वी से करीब 1.08 गुना बड़ा है। वहीं खास बात यह है कि यहां पर पानी भी हो सकता है। ट

वैज्ञानिक ने ग्रह की बताई खास बातें

जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी की वैज्ञानिक डायना कोसाकोवस्की ने जानकारी देते हुए कहा कि वोल्फ 1069बी की स्टडी से साफ है कि वहां जीवन संभव है। वोल्फ 1069बी 15 दिन में अपने तारे का चक्कर लगा रहा है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि बुध ग्रह हमारे तारे यानी सूरज से बहुत नजदीक है और 88 दिन में वह सूरज का चक्कर लगाता है। सूरज के बेहद करीब होने की वजह से वहां की सतह का तापमान 430 डिग्री सेल्सियस है।

वहीं वोल्फ 1069बी कम समय में अपने तारे का चक्कर लगाता है, लेकिन वह रहने लायक दूरी पर स्थित है। खास बात बताते हुए उन्होंन कहा कि वह तारे के पास लॉक्ड पोजिशन पर मौजूद है। इसका मतलब है कि एक तरफ हमेशा रोशनी और दूसरी तरफ पूरा अंधेरा रहता है। हालांकि खोज गए ग्रह पर धरती की तरह दिन-रात नहीं होता है। लेकिन दिन वाले इलाके में रहा जा सकता है। वहीं उन्होंने कहा कि किसी बाहरी ग्रह पर जीवन की मौजूदगी का पता लगाने में अभी 10 साल और लगेंगे।

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