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Bihar News: अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में ₹2.57 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी, 2030 तक 24 GW क्षमता का लक्ष्य

Bihar News: अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में ₹2.57 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी, 2030 तक 24 GW क्षमता का लक्ष्य

Bihar News:बिहार अब अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं तलाश रहा है। राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और अक्षय ऊर्जा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत बिजली उत्पादन, संचरण, वितरण और आधारभूत संरचना सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुल 2,57,316 करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं प्रस्तुत की गई हैं। सरकार का कहना है कि बिहार में निवेश करने वाले उद्योगों और कंपनियों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

बुधवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो-2026 में बिहार ने अपना ऊर्जा विकास मॉडल प्रस्तुत किया। इस दौरान बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि बिहार में विकास और निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं और सरकार निवेशकों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

2030 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य

समिट में ऊर्जा विभाग के सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने राज्य की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और निवेश योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिहार में बिजली की मांग वर्ष 2005 में लगभग 700 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर करीब 10 हजार मेगावाट हो गई है। अनुमान है कि अगले एक दशक में बिजली की मांग लगभग 25 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है।

बिहार अक्षय ऊर्जा नीति-2025 के तहत वित्त वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता और 6 गीगावाट आवर (GWh) ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं पर काम किया जाएगा।

15 लाख परिवारों की छतों पर सोलर लगाने की तैयारी

बिहार सरकार अगले दो से पांच वर्षों में डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और अक्षय ऊर्जा विनिर्माण के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है। राज्य में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करीब 5,000 मेगावाट डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने की योजना है।

इसमें पीएम-कुसुम योजना के तहत 2,700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता, सरकारी भवनों पर सोलर पैनल लगाने से 500 मेगावाट क्षमता और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत करीब 15 लाख परिवारों को रूफटॉप सोलर से जोड़ने का लक्ष्य शामिल है। इसके अलावा औरंगाबाद में 150 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क विकसित करने की भी योजना है। जलाशयों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर

समिट के दौरान बिहार के विद्युत और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड और सेंटर फॉर मिशन ऑन एनर्जी ट्रांजिशन (CMET), MANIT भोपाल के बीच हुआ। इसका उद्देश्य अक्षय ऊर्जा की योजना और विद्युत प्रणाली के प्रबंधन में तकनीकी सहयोग बढ़ाना है।

दूसरा समझौता पावर सेक्टर स्किल काउंसिल, BSPHCL और बिहार पावर ट्रेनिंग मैनेजमेंट सोसाइटी के बीच हुआ। इसके तहत विद्युत क्षेत्र में कौशल विकास, प्रशिक्षण और मानव संसाधन की दक्षता बढ़ाने पर काम किया जाएगा।

तीसरा समझौता बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के बीच हुआ। इसका उद्देश्य विद्युत और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान तथा तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित करना है।

बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन पर भी फोकस

बिहार सरकार सौर ऊर्जा के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण की क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है। समिट में 301 मेगावाट क्षमता की कजरा सौर ऊर्जा परियोजना और 523 मेगावाट आवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का उल्लेख किया गया। राज्य में पंप्ड स्टोरेज नीति-2025, अक्षय ऊर्जा नीति-2025, ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 और औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित करने की तैयारी है।

कार्यक्रम में ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। समिट में हुई चर्चा के दौरान बिहार में निजी निवेश, तकनीकी नवाचार, ऊर्जा भंडारण, विनिर्माण और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इन पहलों से आने वाले वर्षों में बिहार में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।                                                                                                                                                                                                        

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