Bihar News:बिहार अब अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में निवेश का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने बिजली उत्पादन, सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की योजना तैयार की है। बिहार में इन क्षेत्रों में कुल ₹2,57,316 करोड़ के निवेश की व्यापक कार्ययोजना बनाई गई है। वहीं, सरकार ने निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिया है।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो-2026 में बिहार ने अपना ऊर्जा विकास मॉडल प्रस्तुत किया। इस दौरान बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
2005 में 700 मेगावाट थी बिजली की मांग, अब 10 हजार मेगावाट
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 में बिहार में बिजली की मांग करीब 700 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 10 हजार मेगावाट हो गई है। राज्य सरकार ने हर घर बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया है।उन्होंने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक परंपराएं भी सौर ऊर्जा से जुड़ी हुई हैं। छठ महापर्व और सूर्य उपासना की सदियों पुरानी परंपरा राज्य को सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए विशेष रूप से प्रेरित करती है। सरकार पीएम-कुसुम और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से भी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है।
24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य
ऊर्जा सचिव और BSPHCL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने बताया कि अगले एक दशक में बिहार की बिजली मांग लगभग 25 हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। बिहार अक्षय ऊर्जा नीति-2025 के तहत वित्त वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता और 6 गीगावाट आवर ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 301 मेगावाट की कजरा सौर ऊर्जा परियोजना और 523 मेगावाट आवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली पर भी काम किया जा रहा है।
अगले 5 साल में इन 3 क्षेत्रों में होगा निवेश
बिहार सरकार अगले दो से पांच वर्षों में तीन प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।
- डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी: विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करीब 5,000 मेगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।
- बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम: बड़े बैटरी स्टोरेज सिस्टम और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को विकसित किया जाएगा।
- अक्षय ऊर्जा विनिर्माण: सौर ऊर्जा और संबंधित उपकरणों के निर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके तहत पीएम-कुसुम योजना से 2,700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता, सरकारी भवनों के सोलराइजेशन से 500 मेगावाट क्षमता और पीएम सूर्य घर योजना के तहत करीब 15 लाख परिवारों की छतों पर रूफटॉप सोलर लगाने की योजना है।
तीन महत्वपूर्ण MoU पर हुए हस्ताक्षर
समिट के दौरान बिहार में अक्षय ऊर्जा, तकनीकी सहयोग, अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
1. BSPGCL और CMET, MANIT भोपाल के बीच अक्षय ऊर्जा योजना और विद्युत प्रणाली प्रबंधन में सहयोग के लिए समझौता हुआ।
2. पावर सेक्टर स्किल काउंसिल, BSPHCL और BPTMS के बीच विद्युत क्षेत्र में प्रशिक्षण और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए समझौता हुआ।
3. BSPGCL और TERI के बीच विद्युत एवं अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए समझौता किया गया।
सरकार का मानना है कि इन पहलों से बिहार में हरित ऊर्जा निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
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