Bihar News:बिहार में नदियों के पुनर्जीवन, बाढ़ नियंत्रण और सड़क निर्माण को गति देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार (3 नवंबर 2026) को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच 'नदी संजीवनी' कार्यक्रम के तहत समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत नदियों और अन्य जलस्रोतों से निकाली जाने वाली गाद (सिल्ट) का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य सड़क निर्माण परियोजनाओं में किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस पहल से नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, जलप्रवाह में सुधार होगा और हर साल बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का रास्ता खुलेगा। मुख्यमंत्री ने इस समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया।
बिहार देश का पहला राज्य, जिसने बनाई अलग सिल्ट प्रबंधन नीति
इस समझौते को बिहार जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति-2026 के तहत लागू किया जाएगा। बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने नदियों से गाद निकालने और उसके वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए अलग नीति बनाई है।
नीति के तहत नदियों से निकाली गई गाद को सड़क निर्माण की वैकल्पिक सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को जहां भी गाद की जरूरत होगी, वहां बिहार सरकार नियमानुसार खनन लाइसेंस उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी। इससे प्राकृतिक ऊपरी मिट्टी (टॉप सॉयल) के दोहन में भी कमी आएगी और नदी पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
243 लाख क्यूबिक मीटर गाद से होगा सड़क निर्माण
'नदी संजीवनी' कार्यक्रम के तहत बिहार की नदियों से निकाली गई करीब 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद का इस्तेमाल 16 चालू राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा। बिहार में फिलहाल 58,340 करोड़ रुपये के निवेश से NHAI की 39 परियोजनाएं (1,561 किलोमीटर) निर्माणाधीन हैं।
इसके अलावा 1,85,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। राज्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए विभिन्न नदियों पर 29 नए पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है।
महाराष्ट्र के बुलढाणा मॉडल पर होगा काम
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 'नदी संजीवनी' कार्यक्रम के तहत महाराष्ट्र के सफल बुलढाणा मॉडल की तर्ज पर बिहार की नदियों से गाद निकालने का काम किया जाएगा। इससे नदियों का पुनरुद्धार होगा और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना से बिहार सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। नदियों से गाद हटने पर जलधारण और जलप्रवाह क्षमता में सुधार होगा। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और हर साल बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
बिहार में बाढ़ की समस्या कम करने पर जोर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की दो प्रमुख चुनौतियां अधिक आबादी और अनियंत्रित जलप्रवाह रही हैं। नेपाल में भारी बारिश और दूसरे राज्यों से आने वाले पानी के कारण प्रदेश को हर साल बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। वहीं, फरक्का बैराज के कारण गंगा नदी में गाद जमा होने की समस्या भी गंभीर है।
उन्होंने कहा कि नदियों से गाद निकालने और उनका पुनरुद्धार करने से बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। इससे जल प्रबंधन बेहतर होगा और कृषि क्षेत्र को भी लाभ पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री ने गंगा नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार बांग्लादेश को पानी दिए जाने का विरोधी नहीं है, लेकिन राज्य की जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में बिहार को केवल जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर यानी चार महीने ही गंगाजल के उपयोग का अवसर मिलता है। उन्होंने कृषि, उद्योग और पेयजल की जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही नितिन गडकरी से गंगा नदी के दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क बनाने का विशेष आग्रह किया।
एक लाख एकड़ नई जमीन मिलने की उम्मीद
सम्राट चौधरी ने कहा कि नदियों से गाद निकाले जाने के बाद लगभग एक लाख एकड़ नई भूमि उपलब्ध होने की उम्मीद है। इस भूमि का उपयोग मुंबई और दिल्ली की तर्ज पर बिहार में 'गंगा फेसिंग' कॉलोनियां और घर विकसित करने में किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 80 हजार एकड़ भूमि पर 12 नए टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इनमें पटना में पाटलिपुत्र, गया में मगध, मुंगेर में अंग, भागलपुर में विक्रमशिला, सहरसा में कोसी, दरभंगा में मिथिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और मां सीता की जन्मस्थली पर सीतापुरम शामिल हैं।
इसके अलावा बिहार में 10 नए एयरपोर्ट और 32 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन विकास परियोजनाओं और आधारभूत संरचना के निर्माण में नदियों से निकाली गई गाद का उपयोग किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से 'नदी संजीवनी' कार्यक्रम बिहार की प्राकृतिक चुनौतियों को विकास के अवसर में बदलने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों का प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और सड़क निर्माण को एक साथ गति मिलेगी।
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