JSSC-CGL News: दिवाली से ठीक पहले झारखंड के 1900 से ज्यादा चयनित JSSC-CGL अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट द्वारा सरकार के उस फैसलेल को गलत ठहराया गया हैं। जिसमें JSSC की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था। बता दें की झारखंड हाईकोर्ट के न्यायधीश दीपक रौशन ने अदालत में कहा की इस तरह से सामूहिक रूप से परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती हैं। साथ ही आपराधिक अभियोजन के बिना किसी भी अभ्यर्थी को नौकरी से बर्खास्त भी नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद 1900 से अधिक चयनित अभ्यर्थी झारखंड सरकार के साथ अपनी नौकरी जारी रख सकेंगे।
ये हैं पूरा मामला
साल 2024 में आयोजित JSSC-CGL परीक्षा के जरिए अभ्यर्थियों का चयन किया गया था, लेकिन परीक्षा के बाद से ही इसमें कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठने लगे थे। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बीच राज्य में छात्र आंदोलन तेज हो गया और JPSC-JSSC परीक्षाओं की जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठने लगी।इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 17 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में JSSC-CGL समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया गया। सरकार के इस फैसले के बाद पहले से नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया।सरकार के फैसले से नाराज चयनित अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि यदि परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी की है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन इसकी सजा सभी सफल उम्मीदवारों को नहीं दी जा सकती।चयनित अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की है और नियुक्ति प्राप्त की है। ऐसे में बिना व्यक्तिगत दोष साबित किए उनकी नौकरी समाप्त करना उचित नहीं है।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
Also read: दिल्ली-नोएडा जाना होगा आसान, बीकानेर से 295 KM का नया एक्सप्रेसवे, इन रुट पर मिलेगा सीधा फायदा
1900 से ज्यादा अभ्यर्थियों को राहत
हाई कोर्ट के इस निर्णय से 1900 से अधिक चयनित उम्मीदवारों की सरकारी नौकरी जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, कोर्ट ने ये भी साफ किया कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का मामला अलग से चलता रहेगा।गौरतलब है कि 2024 में हुई JSSC-CGL परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद हेमंत सोरेन कैबिनेट ने 17 अगस्त को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था, जिससे नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों पर संकट आ गया था।हाई कोर्ट के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कई महीनों से नौकरी जाने के डर में जी रहे थे। लंबे इंतजार के बाद आया यह फैसला चयनित उम्मीदवारों के लिए दिवाली के तोहफे से कम नहीं है।