Festival of Harvest Baisakhi: उत्तर भारत खासकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कल यानी 14 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को बैसाखी (वैसाखी) का त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाएगा। यह दिन न सिर्फ रबी फसलों की कटाई और नई फसल के स्वागत का प्रतीक है, बल्कि हिंदू सौर कैलेंडर के अनुसार सौर नववर्ष (मेष संक्रांति) का भी आरंभ करता है। बैसाखी संक्रांति का शुभ मुहूर्त सुबह 9:39 बजे शुरू होगा।
बैसाखी का त्योहार
बैसाखी मुख्य रूप से पंजाबी समुदाय का प्रमुख त्योहार है, जो फसल कटाई के मौसम को चिह्नित करता है। इस दिन किसान अपनी मेहनत की उपज का आभार व्यक्त करते हैं और नए सत्र की शुरुआत करते हैं। पंजाब के खेतों में सरसों, गेहूं और अन्य फसलों की कटाई के बाद लोग खुशियां मनाते हैं, बंगा और ढोल की थाप पर भांगड़ा-गिद्दा डांस करते हैं तथा पारंपरिक व्यंजन जैसे लस्सी, मिठाई और सरसों का साग तैयार कर एक-दूसरे के साथ बांटते हैं।
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बैसाखी त्योहार का महत्व
सिख धर्म में बैसाखी का महत्व और भी गहरा है। वर्ष 1699 में इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। गुरु साहिब ने पांच प्यारों (पंज प्यारे) को अमृत छकाकर खालसा बनाया और सिख समुदाय को एक मजबूत, समानता आधारित और बहादुर पहचान दी। इस घटना ने सिख इतिहास में एक नया अध्याय शुरू किया। आज भी बैसाखी को खालसा साजना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन सिख गुरुद्वारों में विशेष अरदास, कीर्तन और लंगर का आयोजन होता है। लाखों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर अमृतसर, आनंदपुर साहिब और अन्य गुरुद्वारों में पहुंचकर गुरु ग्रंथ साहिब के दर्शन करते हैं।
सौर नववर्ष का महत्व
बैसाखी मेष संक्रांति का दिन भी है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं। हिंदू सौर पंचांग के अनुसार यह सौर वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। कई क्षेत्रों में इसे नए साल के रूप में भी मनाया जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन सूर्य की शक्ति बढ़ती है और नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। लोग इस अवसर पर स्नान, दान-पुण्य और मंदिर दर्शन करते हैं।
बैसाखी कैसे मनाएं?
1. सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद गुरुद्वारे या मंदिर जाएं।
2. भांगड़ा-गिद्दा और लोक नृत्य का आनंद लें।
3. परिवार और दोस्तों के साथ पारंपरिक पंजाबी भोजन का स्वाद लें।
4. गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें तथा फसल की सफलता के लिए आभार व्यक्त करें।