Asia Cleanest Village: भारत का एक छोटा सा गांव मावलिननॉन्ग अपनी बेहतरीन साफ-सफाई के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इसे “एशिया का सबसे साफ गांव” भी कहा जाता है। खास बात यह है कि यहां कोई सरकारी सफाईकर्मी नहीं है, फिर भी यह गांव पिछले कई वर्षों से स्वच्छता के मामले में टॉप पर बना हुआ है। यह गांव पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में स्थित है और यहां की सफाई व्यवस्था पूरी तरह लोगों की भागीदारी पर आधारित है। गांव के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने आसपास साफ-सफाई रखे। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी मिलकर गांव को स्वच्छ बनाए रखते हैं।
खास तरिके से होती है सफाई
यहां सबसे खास बात यह है कि लोग कहीं भी कचरा नहीं फेंकते। पूरे गांव में बांस से बने डस्टबिन लगाए गए हैं, जिनका उपयोग कचरा इकट्ठा करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा यहां प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक है। लोग पर्यावरण के अनुकूल चीजों जैसे बांस और प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करते हैं। मावलिननॉन्ग में कचरे को जैविक और अजैविक भागों में अलग-अलग किया जाता है। जैविक कचरे से खेतों के लिए प्राकृतिक खाद तैयार की जाती है, जिससे खेती भी बेहतर होती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।
स्कूलों में बच्चों को सीखाई जाती है सफाई
यहां के लोगों की सोच में सफाई सिर्फ आदत नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा है। बच्चों को छोटी उम्र से ही स्वच्छता का महत्व सिखाया जाता है। स्कूलों में भी साफ-सफाई और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अब यह गांव एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग इसे देखने आते हैं। साफ-सुथरी गलियां, हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है। यहां एक स्काई वॉक भी है, जहां से आसपास की प्राकृतिक सुंदरता देखी जा सकती है।
रविवार को होती है पर्यटकों की नो एंट्री
पर्यटकों के लिए एक नियम यह भी है कि रविवार को गांव में बाहरी लोगों की एंट्री बंद रहती है। इसलिए यात्रा की योजना बनाते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है। मावलिननॉन्ग पहुंचने के लिए पहले गुवाहाटी या शिलॉन्ग जाना होता है, फिर वहां से टैक्सी लेकर लगभग 80-90 किलोमीटर का सफर तय करके गांव पहुंचा जा सकता है। रास्ते में डावकी नदी का सुंदर नजारा भी यात्रा को और खास बना देता है।
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