
नई दिल्ली: APPLE... इसके नाम से सबसे पहले लोगों के ज़हन में एप्पल स्मार्टफोन का ख्याल आता है। वैसे इस कंपनी के फोन को खरीदना इतना आसान नहीं है। एप्पल फोन के शुरूआती कीमत 50 हजार से होती है इसलिए इसको खरीदना आसान नहीं है। ये तो बात हो गई इस कंपनी की कीमत की, लेकिन इस कंपनी से पहले इसके लोगो पर ध्यान दिया जाता है जिसे आज के जमाने में बच्चा-बच्चा जानता है।
दरअसल लोगो एक कंपनी की पहचान होती है। जिससे उस कंपनी को लोगों के मन में रखा जाए। एप्पल के लोगो की बात करें तो एक कटा हुआ सेब है जो हर किसी को याद और ध्यान में रहता है। लेकिन, क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि एप्पल कंपनी ने आधा कटा हुआ लोगो क्यों लिया है। इसके पीछे एक वजह है जिससे जानकर आपको इन सभी बातों का जवाब मिल जाएंगा।
दरअसल इस कंपनी के अमेरिकी कंपनी एप्पल के नाम से भी पहचाना जाता है। इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1976 को स्टीव जॉब्स, स्टीव वोजनियाक और रोनाल्ड वेन ने की थी। इसकी शुरुआत का मकसद पर्सनल कंप्यूटर बनाना था। वहीं स्थापना के अगले साल 1977 में कंपनी का नाम 'ऐप्पल इंक' रखा गया। वहीं पहला लोगो आइज़क न्यूटन की तस्वीर थी। जिसमें वो सेब के पेड़ के नीचे बैठे थे। तस्वीर उस घटना को बयां कर रही थी जिसने न्यूटन को गुरुत्वाकर्षण खोज के लिए प्रेरित किया।
इस विद्वान की वजह से बना एप्पल का लोगो
जिसके बाद एप्पल के लोगो को बदलने का निर्णय लिया गयाइसके पीछे भी एक वजह है। बताया जाता है कि कम्प्यूटर साइंस के विद्वान माने जाने वाले एलन टर्निंग की 1954 में अचानक मौत हो गई थी। उनके शव के पास से एक जहरीला सेब मिला था, जिसको खाया हुआ था।वहीं जेनोफ का मानना था कि सेब एक ऐसा फल है, जिसकी शेप थोड़ी सी कटने के बाद भी पहचानी जा सकती है। इसलिए रोब जेनोफने कटे हुए एप्पल के लोगोको तैयार किया और स्टीव जॉब्स को दिखाया। जिससे देखते ही जॉब्स को पसंद आ गया। उसके बाद इस कटे हुए लोगो को लगाया गया।
APPLEही नाम क्यों रखा
बता दें कि जॉब्सका अपना एक सेब का बागीचा था और वह वहां अपना काफी समय बिताते थे। जब वो कंपनी बनाने जा रहे थे, तो नामों की लिस्ट में ऐप्पल नाम सबसे ऊपर था।
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