
Iran US Tension: अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी वक्त जंग की स्थिति बन सकती है, और इसी बीच अमेरिका का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड मिडिल ईस्ट में तैनात है। लेकिन अब यह जहाज अपने तकनीकी संकट के कारण नौसैनिकों के लिए मुश्किलों का सबब बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज पर लगे लगभग 650 टॉयलेट में से अधिकांश जाम हो चुके हैं। सीवेज सिस्टम फेल होने की वजह से 4,500 से अधिक नौसैनिकों को रोजाना लगभग 45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ता है।
नियमित रखरखाव न होने के कारण यह समस्या पैदा हुई है। नौसैनिकों और टेक्नीशियनों के बीच प्लंबिंग और मरम्मत को लेकर अक्सर बहस भी होती है। टेक्नीशियन रोजाना 19 घंटे काम कर सिस्टम ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं।
2025 से समुद्र में तैनात
USS जेराल्ड आर. फोर्ड जून 2025 से समुद्र में तैनात है। जनवरी में इसी जहाज ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। अब ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इसे मध्य पूर्व में तैनात किया गया है। जहाज के टॉयलेट और सीवेज सिस्टम की समस्या एक तकनीकी खामी से जुड़ी है। अत्याधुनिक सुविधाओं के बावजूद यह नाजुक वैक्यूम आधारित सीवेज सिस्टम पर निर्भर है। इस प्रणाली में एक वॉल्व की खराबी पूरे जहाज के टॉयलेट को बंद कर सकती है। सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए एसिड फ्लश पर लगभग चार लाख डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।
जवानों की बढ़ी परेशानी
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन तकनीकी समस्याओं का सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ा है। लेकिन लंबी तैनाती और लगातार काम के दबाव के कारण नौसैनिकों की थकान और तनाव साफ दिख रहा है। कई जवान घर से दूर रहने और कठिन परिस्थितियों की वजह से मिशन पूरा होने के बाद सेना छोड़ने तक का विचार कर रहे हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल रेड सी में भी अत्यधिक ऑपरेशनल गति और काम के बोझ के कारण USS हैरी एस. ट्रूमैन ने कई फाइटर जेट गंवा दिए थे। इसके मद्देनजर, USS जेराल्ड आर. फोर्ड की वर्तमान स्थिति अमेरिका के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।
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