
8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को जल्द लागू करने की मांग के बीच केंद्र सरकार के कर्मचारियों की यूनियनों ने एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल करने की मांग तेज कर दी है। कई कर्मचारी संगठनों ने राष्ट्रीय संयुक्त सलाहकार तंत्र (NC-JCM) को अपनी मांगों का प्रस्ताव सौंपा है।
केंद्र सरकार ने संसद में दी जानकारी
कर्मचारी यूनियनों जैसे कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉयीज एंड वर्कर्स और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) ने साफ कहा है कि उनकी सबसे बड़ी मांग नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को खत्म करके पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करना है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि पिछले साल नवंबर तक सिर्फ 1,22,123 कर्मचारियों ने ही यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को अपनाने के लिए सहमति दी थी। इनमें मौजूदा कर्मचारी, नए कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 25 लाख पात्र कर्मचारियों में से केवल 4 से 5 प्रतिशत कर्मचारियों ने ही UPS को स्वीकार किया है। UPS अपनाने वालों में 38,569 सिविल कर्मचारी और 23,529 रेलवे कर्मचारी शामिल हैं।
कर्मचारी 20 साल से कर रहे ये मांग
दरअसल कर्मचारी संगठन पिछले करीब 20 साल से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 से नए कर्मचारियों के लिए OPS को बंद कर दिया था और उसकी जगह NPS लागू कर दिया था। OPS के तहत कर्मचारियों को उनकी अंतिम सैलरी के आधार पर तय पेंशन मिलती थी और समय-समय पर महंगाई भत्ता (DA) के अनुसार इसमें बढ़ोतरी भी होती थी। वहीं NPS बाजार से जुड़ी व्यवस्था पर आधारित है, जिसमें मिलने वाला रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है।
सरकार ने क्या लिया फैसला?
हालांकि कर्मचारी संगठनों की बार-बार मांग के बावजूद केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि NPS वित्तीय रूप से टिकाऊ है और इससे लंबे समय में पेंशन का बोझ नियंत्रित रखा जा सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि UPS को लेकर कर्मचारियों की कम प्रतिक्रिया और OPS की लगातार उठती मांग के कारण 8वें वेतन आयोग की चर्चाओं के दौरान केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले समय में पेंशन का मुद्दा सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सबसे बड़ा विवाद का विषय बन सकता है।
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