
नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 2 अप्रैल से हो चुकी है। नवरात्रि में माता के नौ रूपों की उपासना की जाती है। आज शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है और सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरुप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है।
मां को सच्चे मन से पूजने वाले को हमेशा मोक्ष मिलता है। मोक्ष का मतलब होता है हर मुसीबत से छुटकारा पाना। जो कोई भी उनकी पूजा करता है उसकी गोद हमेशा भरी रहती है। दुर्गा मां के सातवें रूप मां कालरात्रि को लाल वस्त्र में सुहाग का सामान जैसे, लाल चूड़ी, महावर, लाल बिंदी, नेलपेंट, सेब और लाल फूल बांधकर चढ़ाने से संतान की प्राप्ति होती है।
आइए जानते है मां के सातवें स्वरूप को कालरात्रि क्यों कहा जाता है
मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण है। कृष्ण वर्ण के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की 4भुजाएं हैं। पौराणिक कथा के अनुसार असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए दुर्गा मां ने मां कालरात्रि का रूप लिया था।
मां कालरात्रि की पूजा विधि-मंत्र जाप
मां कालरात्रि को खुश करने के लिए पूजा में मिष्ठान, पंच मेवा, पांच प्रकार के फल,अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ नैवेद्य आदि जरूर चढ़ाएं। इस दिन गुड़ का विशेष महत्व बताया गया। इसके साथ ही ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम, ॐ कालरात्र्यै नम: जाप करना चाहिए। आज के दिन माता को अलसी का भोग और केले का भोग जरूर लगाएं. इनकी पूजा कुश या कंबल के आसन पर बैठ कर पूजा करें।
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