
नई दिल्ली: भारत तीज त्योहारों का देश है। आस्था और संस्कार के पर्व यहां आए दिन ही आते हैं। धर्म और आस्था से जुड़े यह त्योहार न केवल श्रद्धा के केंद्र होते हैं बल्कि यह देश को लोगों को मानवता, करुणा और संस्कारों का पाठ भी बढ़ाते हैं। बता दें कि आज ऐसा ही त्योहार है। आज अक्षय तृतीया है। मुहूर्त के अनुसार आज दिन में 11 बजकर 12 मिनट तक तृतीया रहेगी. रोहिणी नक्षत्र और शोभन योग की अक्षय तृतीया सर्वोत्तम मानी गई है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से धन संपदा में अक्षय वृद्धि होती है। अक्षय तृतीया के दिन हरिहर अर्थात् भगवान विष्णु एवं शिव की संयुक्त पूजा करना भी फलप्रद होता है।
आज के दिन विधान यह है कि सर्वदेव स्वरूप श्री शालिग्राम जी का रुद्राष्टध्यायी के द्वितीय एवं पंचम अध्याय का पाठ करते हुए पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए. ऐसे आराधक इस लोक में सुख प्राप्त कर विष्णु-शिव लोक प्राप्त करते हैं. अक्षय तृतीया के दिन प्रातःकाल 06 बजकर 36 मिनट से दिन में 10 बजकर 42 मिनट के मध्य भगवान विष्णु के पूजन का उत्तम मुहूर्त है। हालांकि मध्यमुहूर्त में आप बाद में भी पूजा कर सकते हैं। भविष्य पुराण में भी कहा गया है कि इस दिन किया गया तीर्थ, तप और दान अनंत फलदायी होता है। भविष्योत्तर पुराण में कृष्ण-अर्जुन संवाद के माध्यम से अक्षय तृतीया का महत्व बताते हुए कृष्ण कहते हैं कि यह तिथि हर एक पुण्य कार्य का अक्षय फल देने वाली है, वहीं विष्णु धर्मोत्तर पुराण में कहा गया है कि इस दिन उपवास के सुकृत का अक्षय फल मिलता है.
अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्मी और विष्णुजी की पूजा का विधान है। इस मंदिरों में जाकर पूजा आराधना कर भगवान को प्रसन्न किया जा सकता है। बाजारों के बंद होने से आप इस शुभ मौके पर पहली बार ग्राहक सोने की खरीदारी ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं। बता दें कि आज ब्रांडेड सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 50,000 रुपये के ऊपर जा चुकी है।
शुभ कार्य में न करें देरी
अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान नर-नारायण सहित परशुराम और हय ग्रीव का अवतार हुआ था। इसके अलावा, ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन हुआ था। आज के दिन पंखा, चावल, नमक, घी, चीनी, सब्जी, फल, इमली और वस्त्र वगैरह का दान अच्छा माना जाता है। बता दें कि यह व्रत गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है. बद्रीनारायण के कपाट भी इसी दिन खुलते हैं। पौराणिक कहानियों के मुताबिक, इसी दिन महाभारत की लड़ाई खत्म हुई थी। द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर के पूछने पर यह बताया था कि आज के दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक कार्य करोगे, उसका पुण्य मिलेगा।
कोई भी नया काम, नया घर और नया कारोबार शुरू करने से उसमें बरकत और ख्याति मिलेगी। आज स्नान, ध्यान, जप तप करना, हवन करना, स्वाध्याय पितृ तर्पण करना और दान पुण्य करने से पुण्य मिलता है। जिनके अटके हुए काम नहीं बन पाते हैं, व्रत उपवास करने के बावजूद जिनकी मनोकामना की पूर्ति नहीं हो पा रही हो और जिनके व्यापार में लगातार घाटा चल रहा हो, उनके लिए कोई भी नई शुरुआत करने के लिए अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ माना जाता है।
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