
US Tariff on Iran Trade: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12जनवरी 2026को ईरान के खिलाफ एक बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर और अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी बिजनेस करने पर 25प्रतिशत का टैरिफ लगाया जाएगा। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और वैश्विक व्यापार में बड़े बदलाव ला सकता है। ट्रंप की यह नीति ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब वहां विरोध प्रदर्शन हो रहे है।
ट्रंप का ऐलान और उसकी वजह
ट्रंप ने सोमवार को एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा 'तत्काल प्रभाव से, ईरान इस्लामिक गणराज्य के साथ कारोबार करने वाले देश को अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी बिजनेस पर 25%टैरिफ का भुगतान करेगा।' यह घोषणा ईरान में जारी अशांति और प्रदर्शनों के संदर्भ में आई है, जहां हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें आ रही हैं। ट्रंप प्रशासन की यह नीति ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है, जो पहले भी ट्रंप के पहले कार्यकाल में देखी गई थी। अमेरिका का मानना है कि यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था को और कमजोर करेगा और उसके सहयोगियों को अलग करेगा। ट्रंप ने इस आदेश को अंतिम और निर्णायक बताया है।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
बता दें, यह टैरिफ ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों जैसे चीन, भारत और यूरोपीय संघ के देशों को सीधे प्रभावित कर सकता है। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साथी है, जो उसके लगभग 30प्रतिशत व्यापार को संभालता है। इस फैसले से अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध फिर से भड़क सकता है, क्योंकि चीन पर पहले से ही कुछ टैरिफ लगे हुए हैं। इसके अलावा ट्रंप का यह फैसला भारत के लिए भी चुनौती है, जो पहले से रूसी तेल खरीद पर 50प्रतिशत टैरिफ का सामना कर रहा है; अब ईरान से व्यापार पर अतिरिक्त 25प्रतिशत का बोझ कुल 75प्रतिशत तक पहुंच सकता है। अन्य देश जैसे तुर्की और पाकिस्तान भी प्रभावित हो सकते हैं। वैश्विक बाजारों में इस ऐलान से स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
मालूम हो कि ट्रंप का यह कदम उनके पहले कार्यकाल की ईरान नीति की याद दिलाता है, जब उन्होंने ईरान न्यूक्लियर डील से अमेरिका को बाहर कर लिया था। वर्तमान में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं और अमेरिका इन प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहा है। यह टैरिफ ईरान की अर्थव्यवस्था को और दबाव में डाल सकता है, जो पहले से ही प्रतिबंधों से जूझ रही है।
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