200% जुर्माना और 7 साल की सजा..., अब ITR में फर्जीवाड़ा का पर्दाफाश करेगा AI

200% जुर्माना और 7 साल की सजा..., अब ITR में फर्जीवाड़ा का पर्दाफाश करेगा AI

ITR Update: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय चल रहा है और इस बार आयकर विभाग (Income Tax Department) ने फर्जी दावों और गलतियों पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। नई तकनीकों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स की मदद से विभाग अब फर्जी कटौतियों और गलत दावों को तुरंत पकड़ रहा है। गलत या फर्जी दावे करने वालों को आयकर अधिनियम के तहत 200%तक का जुर्माना और 07साल तक की कैद का सामना करना पड़ सकता है।

आयकर विभाग की सख्ती

आयकर विभाग ने करदाताओं के बीच फर्जी दावों को रोकने के लिए उन्नत तकनीकों का सहारा लिया है। विभाग अब वार्षिक सूचना विवरण (Annual Information Statement - AIS) और फॉर्म 26AS के डेटा के साथ ITR में दी गई जानकारी का मिलान करता है। AI-संचालित सिस्टम इन डेटा में छोटी से छोटी विसंगति को पकड़ लेता है।

विभाग ने हाल ही में 40,000से अधिक करदाताओं द्वारा ₹1,045करोड़ के फर्जी दावों को रद्द करवाया है। बता दें, यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ थी, जो रिफंड एजेंटों के बहकावे में आकर गलत कटौतियां दर्शा रहे थे। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 'अब केवल फॉर्म भरना काफी नहीं है; हर दावे के लिए ठोस दस्तावेजी सबूत होना जरूरी है।'

जुर्माना और सजा

आयकर अधिनियम, 1961की धारा 270A के तहत, आय को गलत तरीके से दर्शाने पर 200%तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। मान लीजिए, यदि कोई करदाता ₹5लाख की आय छिपाता है और उस पर ₹1.5लाख का कर बनता है, तो उसे ₹3लाख तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अलावा धारा 276C के तहत यदि कर चोरी की राशि ₹25लाख से अधिक है, तो सात साल तक की कैद और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। यदि राशि ₹25लाख से कम है, तो कम से कम तीन महीने से दो साल तक की सजा हो सकती है।

इसके अलावा आय के कम दर्शाने पर भी 50%का जुर्माना लगाया जा सकता है। लेकिन यह तब लागू होता है, जब गलती अनजाने में की गई हो। फर्जी दस्तावेज, जैसे - नकली किराया रसीदें, गलत दान रसीदें या व्यक्तिगत खर्चों को व्यावसायिक खर्च के रूप में दर्शाना, मिसरिपोर्टिंग माना जाता है। बता देंस इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान भी तय किया गया है।

आम गलतियां जो बन सकती हैं मुसीबत

आयकर रिटर्न दाखिल करते समय कुछ सामान्य गलतियां करदाताओं को भारी पड़ सकती हैं:

1. HRA में फर्जी दावे: बिना किराया समझौते या मकान मालिक के PAN के HRA दावे करना। जैसे - माता-पिता को किराया दिखाने पर यदि उनके ITR में यह आय दर्ज नहीं है, तो यह पकड़ा जा सकता है।

2. धारा 80C और 80G के तहत गलत दावे: बिना रसीद या सबूत के निवेश या दान के दावे करना।

3. अन्य आय को छिपाना: फ्रीलांसिंग, क्रिप्टो, या साइड जॉब से होने वाली आय को नहीं दर्शाना।

4. गलत ITR फॉर्म चुनना: आय के स्रोतों और स्तर के आधार पर गलत फॉर्म चुनने से रिटर्न रद्द हो सकता है।

5. निजी खर्चों को व्यावसायिक दिखाना: व्यक्तिगत खर्चों को व्यवसाय के खर्च के रूप में दर्शाना।

ITR के नए नियम 

आयकर विभाग ने मूल्यांकन वर्ष 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-4 फॉर्म में बदलाव किए हैं, जो पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। अब करदाताओं को कटौतियों के लिए विशिष्ट दस्तावेजी सबूत, जैसे निवेश की रसीदें, बीमा पॉलिसी नंबर, और ऋण खाता विवरण, जमा करना अनिवार्य है। जैसे - धारा 80C के तहत दावों के लिए PPF या ELSS की रसीद, और धारा 80D के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी नंबर देना होगा।

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