शेख हसीना को लेकर बांग्लादेश-भारत के बीच टेंशन, पत्र लिखकर बढ़ाया दबाव; कहा - उन्हें हमें सौंप दें

शेख हसीना को लेकर बांग्लादेश-भारत के बीच टेंशन, पत्र लिखकर बढ़ाया दबाव; कहा - उन्हें हमें सौंप दें

Sheikh Hasina Extradition Demand:बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की है। रविवार को जारी एक बयान में कहा गया कि भारत को 'अनिवार्य जिम्मेदारी' के तहत हसीना को सौंपना चाहिए, जो हाल ही में मौत की सजा पाने के बाद फरार हैं। बांग्लादेश ने भारत को एक आधिकारिक पत्र भेजा है, जिसमें हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमल के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है। यह मांग ऐसे समय में आई है जब हसीना अगस्त 2025 में सत्ता से बेदखल होने के बाद भारत में शरण लिए हुए हैं।

बांग्लादेश ने भारत को लिखा पत्र

जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को भारत को पत्र भेजा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा 17 नवंबर को हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने का हवाला दिया गया। ICT ने हसीना को 2013 में हुए अपहरण और हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया है। अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार ने कहा कि हसीना को वापस लाकर न्याय की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पत्र में भारत से अनुरोध किया गया है कि वह प्रत्यर्पण संधि के तहत सहयोग करे।

बता दें, शेख हसीना, जो 78 वर्ष की हैं, बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली प्रधानमंत्री रहीं, लेकिन अगस्त में छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। वे भारत भाग आईं और तब से दिल्ली में रह रही हैं। बांग्लादेश की नई सरकार ने हसीना पर कई आरोप लगाए हैं, जिसमें मानवाधिकार उल्लंघन और दमन शामिल हैं। मौत की सजा के बाद, ढाका ने भारत से 'बिना देरी' के प्रत्यर्पण की मांग की है।

भारत ने अभी तक इस मांग पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया जटिल हो सकती है, क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है, लेकिन राजनीतिक शरण और मानवाधिकार मुद्दे इसमें बाधा बन सकते हैं। हसीना के भारत में रहने से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है, जो पहले से ही संवेदनशील हैं।

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