SC ने इस वर्ग के क्रीमी लेयर तय करने की परिभाषा में किया बदलाव, अब ज्यादा लोगों को मिलेगा आरक्षण?

SC ने इस वर्ग के क्रीमी लेयर तय करने की परिभाषा में किया बदलाव, अब ज्यादा लोगों को मिलेगा आरक्षण?

Supreme Court On OBC Creamy Layer: सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी क्रीमी लेयर को लेकर फैसला सुनाया है। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और आर महादेवन की बेंच ने मद्रास, केरल और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए ये निर्णय सुनाया है।

बता दें कि तीनों हाईकोर्ट ने सिविल सर्विस परीक्षा में ओबीसी का फायदा पाने वाले उम्मीदवारों की एलिजिबिलिटी की जांच की थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद ओबीसी कैटेगरी के उम्मीदवारों को आरक्षण का ज्यादा लाभ मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर की परिभाषा बदली

सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी क्रीमी लेयर तय करने की परिभाष को बदल दिया है। सुनवाई के दौरान सु्प्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि सिर्फ पारिवारिक इनकम के आधार पर ओबीसी क्रीमी लेयर तय नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की तरह ही पब्लिक या प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के बच्चों का ओबीसी क्रीमी लेयर तय करने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा  

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ओबीसी क्रीमी लेयर तय सिर्फ इनकम के आधार पर नहीं होना चाहिए। ये पूरी तरह से उम्मीदवार के माता-पिता के स्टेटस या पोस्ट के आधार पर तय होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बिना किसी तरह सही कारण के एक ही पिछड़े वर्ग के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाने वाली व्याख्या ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने बराबरी सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को निर्देश दिया है कि वह क्रीमी लेयर की पहचान करें और उसे बाहर करने के लिए पॉलिसी तैयार करें। 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या बदलाव किया

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 2004 में जारी लेटर के पैरा 9 को अमान्य करार कर दिया है। अब बैंक/प्राइवेट नौकरी वालों की सैलरी की सीमा से ही क्रीमी लेयर तय नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में पहले पोस्ट की सरकारी ग्रुप III और IV के साथ समानक तय किया जाएगा। तब तक केवल 1993 OM लागू होगा। इसके साथ ही 8 लाख की इनकम का दायरा भी रद्द कर दिया गया है, अब ओबीसी कर्मचारी जिनका वेतन 8 लाख से ज्यादा हैं, वह भी नॉन क्रीमी लेयर की श्रेणी में रहेंगे।

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