
नई दिल्ली: एक तरफ भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक कर 90 आतंकियों को मौत के घाट उतारा दिया है। दूसरी तरफ भारत सरकार ने आज, 7मई को देश के 295स्थानों पर मॉक ड्रिल का आदेश दिया है। ये मॉक ड्रिल केवल अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की व्यापक सैन्य तैयारी का संकेत माना जा रहा है।
इतिहास में अगर पीछे देखें, तो इस स्तर की मॉक ड्रिल आखिरी बार 1971में हुई थी, जब भारत और पाकिस्तान युद्ध के मुहाने पर थे। उसी युद्ध में पाकिस्तान को दो हिस्सों में बाँटकर भारत ने बांग्लादेश का निर्माण कराया था।
डोभाल की पुरानी चेतावनी आज भी उतनी ही प्रासंगिक
चार साल पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था, "अगर पाकिस्तान ने कोई हरकत की, तो हम घर में घुसकर जवाब देंगे।" उन्होंने ये भी साफ किया था कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक नीति पर चलेगा।
ये बयान उस आतंकी हमले से पहले का था जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26पर्यटकों की जान गई थी। डोभाल के उस बयान और आज की तैयारियों को जोड़कर देखा जाए, तो ये साफ है कि भारत अब किसी सीमित जवाब तक नहीं रुकेगा।
बलूचिस्तान भारत की रणनीति का नया केंद्र
पहले आतंकी हमले सुरक्षाबलों पर केंद्रित होते थे, लेकिन अब आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। यही कारण है कि भारत इस बार बलूचिस्तान पर फोकस कर रहा है, पाकिस्तान का वह क्षेत्र, जहां लोग दशकों से शोषण और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
बलूच जनता लंबे समय से आज़ादी की मांग कर रही है। भारत यदि उन्हें कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहयोग मिल सकता है, क्योंकि पहले से ही दुनिया पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क को लेकर सतर्क है।
भारत की नई नीति: बदला नहीं, स्थायी बदलाव
भारत अब सिर्फ जवाबी हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता। उसकी दो स्पष्ट रणनीतियाँ सामने आ रही हैं:
1. पाकिस्तान के भीतर दबाव बनाकर कोई बड़ा हिस्सा अलग करना।
2. सैन्य और रणनीतिक तैयारी से पाकिस्तान को बिना युद्ध के झुकने पर मजबूर करना।
मॉक ड्रिल, सीमाओं पर बढ़ी गतिविधियां, डोभाल का बयान और बलूचिस्तान को लेकर बढ़ती चर्चा, ये सभी संकेत करते हैं कि भारत अब बदला नहीं, बदलाव चाहता है। ऐसा बदलाव जो इतिहास में दर्ज हो और पाकिस्तान के नक्शे को बदल दे।
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