Congo Ebola Virus Outbreak: हाल ही में एमवी होंडियस नाम के एक लग्जरी क्रूज शिप पर हंतावायरस के मामले सामने से दुनियाभर में डर का माहौल बना हुआ है। इस बीच, अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस ने फिर से दस्तक दी है। अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र ने पुष्टि की है कि पूर्वी इटुरी प्रांत में इबोला वायरस डिजीज (ईवीडी) का नया प्रकोप फैल रहा है। इस मामले में अब तक 246 संदिग्ध केस सामने आए हैं। जबकि 65 मौतें दर्ज की गई हैं।
बुनिया-युगांडा में भी खतरा
अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार, ये वायरस मुख्य रूप से इटुरी प्रांत के मोंगवालु और रवामपारा स्वास्थ्य क्षेत्रों में केंद्रित है। इसके अलावा कुछ मामले प्रांतीय राजधानी बुनिया से भी सामने आए हैं। इस वायरस से पड़ोसी देश युगांडा भी प्रभवित हुआ है। वायरस के बारे में पता लगाने के लिए 20 सैंपलों की जांच की गई, जिसमें से 13 में वायरस की पुष्टि हुई है।
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कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप
बता दें, साल 1976 में इस वायरस की पहचान की गई थी। जिसके बाद से कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप है। इसके बाद साल 2018-020 में इसका सबसे घातक प्रकोप देखा गया, जिसमें 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। हालांकि, इस बार के इबोला प्रकोप की जांच से पता चला है कि यह बुंडिबुग्यो स्ट्रेन (Bundibugyo ebolavirus) का है, इस बार ये वायरस तेजी से फैल रहा है। इसका कारण लोगों का विस्थापन हो सकता है। लोगों की लगातार आवाजाही से संक्रमण के बारे में पता लगाना खोजडा मुश्किल हो गया। जो ज़ैरे स्ट्रेन से अलग है। जानकारी के अनुसार, ज़ैरे स्ट्रेन के लिए वैक्सीन उपलब्ध है।
इबोला कितना खतरनाक है?
आगे बताते चले कि इबोला एक गंभीर हेमोरेजिक फीवर है, जिसका संबंध फिलोवायरस परिवार से है। यह संक्रमित व्यक्ति के रक्त, उल्टी, मल, पसीने, लार, मृत व्यक्ति के शव को छूने से या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। अब अगर इसके लक्षणों की बात करें तो इबोला वायरस का शिकार होने पर तेज बुखार, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर रैश जैसे लक्षण दिखते थी।