
नई दिल्ली: पिछले कुछ दशकों से पूरा विश्व आधुनिकता की दौड़ में भाग रहा है। आधुनिक बनने की होड़ में प्रत्येक देश पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहा है। पर्यावरण दिवस की शुरुआत 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से हुई थी। इसी दिन यहां पर दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था। स्वीडन के इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की भी नींव पड़ी और विश्व पर्यावरण मनाने का संकल्प लिया गया। इस सम्मेलन में भारत की ओर से तात्कालिक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भाग लिया था। इसी दिन से 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया गया था।
इस आधुनिकता के कारण धरती पर हर दिन प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। मानव द्वारा पर्यावरण को पहुंचाए नुकसान का दुष्परिणाम समय-समय पर हमें देखने को मिलता रहता हैं। ऐसे में लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करने के लिए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।इसकी शुरूआत वर्ष 1972 में हुई थी। पहली बार 5 जून को संयुक्त राष्ट्र के तत्वाशवधान में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था, और उसके बाद से हर साल इसी तारीख को यह खास दिन मनाया जाता है। इस दिन कई कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को पर्यावरण और प्रदूषण से हो रहे नुकसान के प्रति जागरुक किया जाता है।
जिस तरह से पर्यावरण हमें बार-बार इसकी चेतावनी दे रही है कि पर्यावरण को अब नुकसान न पहुंचाएं।पूरे विश्व को इसके लिए सोचने की जरूरत है। पर्यावरण में अचानक प्रदूषण का स्तर बढ़ने से जयवायु परिवर्तन देखा जा रहा है। प्रदूषण का बढ़ता स्तर पर्यावरण के साथ ही इंसानों के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसके कारण कई जीव-जन्तू विलुप्त हो रहे हैं। वहीं इंसान कई प्रकार की गंभीर बिमारियों का शिकार भी हो रहे है।
विश्व पर्यावरण दिवस मनाए जाने से पहले हर साल के लिए एक थीम रखा जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम 'पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली’ है। इस लोगों को हर साल पर्यावरण में हो रहे बदलाव से अवगत कराया जा सके और पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने के लिए लोगों को समय-समय पर जागरुक किया जा सके।
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