
Imran Khan Statement: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान ने हाल ही में एक बार फिर देश की सियासत में हलचल मचा दी है। जेल में बंद होने के बावजूद उन्होंने मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार को 'कठपुतली' करार दिया। उन्होंने कहा कि वह एक ऐसी सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे, बल्कि सीधे पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना से संवाद करेंगे। उनका यह बयान पाकिस्तान के जटिल सियासी परिदृश्य में सेना की भूमिका और सिविल-मिलिट्री रिश्तों पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।
इमरान खान ने शहबाज शरीफ सरकार पर साघा निशाना
बता दें, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान मई 2023से जेल में हैं। उन्होंने हाल ही में रावलपिंडी की अदियाला जेल से अपने वकीलों के माध्यम से एक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने बताया 'वह शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली सरकार को गंभीरता से नहीं लेते। उनके मुताबिक, असली ताकत सेना के पास है, शहबाज शरीफ की सरकार सिर्फ सेना की कठपुतली है। इसलिए हम कठपुतलियों से बात नहीं करेंगे। अगर बात करनी है, तो सीधे उनसे करेंगे जो सत्ता के असली मालिक हैं।'
लेकिन यह पहली बार नहीं है जब इमरान खान ने सेना पर निशाना साधा है। इससे पहले मई 2023में उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए थे, जिसके बाद सेना और PTI के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। इमरान खान ने कई बार दावा किया है कि उनकी सरकार को 2022में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाने में सेना और अमेरिका की साजिश थी।
इमरान खान ने सेना प्रमुख पर कसा तंज
वहीं, हाल ही में एक एक्स पोस्ट में इमरान खान ने जनरल असीम मुनीर पर तंज कसते हुए कहा था कि उन्हें 'फील्ड मार्शल' के बजाय 'राजा' की उपाधि लेनी चाहिए। क्योंकि देश में 'जंगलराज' चल रहा है। यह बयान न केवल सेना की सियासी दखलंदाजी पर तीखा प्रहार है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि खान अपनी रिहाई और सियासी वापसी के लिए सेना के साथ सीधे टकराव की रणनीति अपना रहे हैं।
पाकिस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका हमेशा से केंद्रीय रही है। ऐसे में इमरान खान का यह बयान इस हकीकत को रेखांकित करता है कि सिविल सरकारें अक्सर सेना के प्रभाव में काम करती हैं। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और शहबाज शरीफ सरकार के बीच करीबी रिश्तों की चर्चा आम है, जिसे इमरान खान ने अपने बयान में कठपुतली सरकार कहकर उजागर किया।
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