
Mauni Amavasya Snan-Daan Shubh Muhurat: हिंदू कैलेंडर में माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, जो आत्मिक शुद्धि, मौन व्रत और पूर्वजों की पूजा के लिए विशेष महत्व रखती है। इस साल यह पवित्र दिन आज रविवार 18जनवरी को पड़ रहा है, जब गंगा स्नान, दान और तर्पण से पितृ दोष दूर करने और परिवार में शांति-समृद्धि प्राप्त करने की मान्यता है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु प्रयागराज के त्रिवेणी संगम या गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं, जबकि घर पर भी गंगा जल से स्नान किया जा सकता है।
मौनी अमावस्या की तिथि और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 18जनवरी को रात 12:03बजे से शुरू होकर 19जनवरी को रात 1:21बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर मुख्य उत्सव 18जनवरी को मनाया जाएगा, जो रविवार होने से सूर्य देव की कृपा से और अधिक फलदायी माना जाता है।
मौनी अमावस्या का महत्व
यह दिन माघ मेले का हिस्सा है, जहां स्नान से अमृत तुल्य फल मिलता है। मौन व्रत से मन की शांति, स्नान से शरीर की शुद्धि और तर्पण से पितरों की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक ग्रंथों में इसे पितृ दोष दूर करने और परिवार की समृद्धि के लिए सर्वोत्तम माना गया है। रविवार को पड़ने से सूर्य देव की ऊर्जा से दिन की शक्ति बढ़ जाती है।
शुभ मुहूर्त और योग
ब्रह्म मुहूर्त:सुबह 5:27से 6:21बजे तक यह स्नान, दान और पूजा के लिए सबसे उत्तम समय है।
सर्वार्थ सिद्धि योग:18जनवरी को सुबह 10:14बजे से 19जनवरी को सुबह 7:31बजे तक – किसी भी कार्य की सफलता के लिए लाभकारी।
हर्षण योग और शिव वास योग:पूरे दिन मौजूद – ये योग आध्यात्मिक सफाई और पूजा के लिए शुभ फल देते हैं।
नक्षत्र:पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा - स्नान और दान के लिए अनुकूल।
स्नान, दान, पूजा और तर्पण की विधि
मौनी अमावस्या पर मुख्य रूप से मौन व्रत रखा जाता है, जिसमें बोलने से परहेज कर आत्म-चिंतन किया जाता है। विधि इस प्रकार है:
1. स्नान विधि:ब्रह्म मुहूर्त में उठें, मौन रहते हुए पवित्र नदी जैसे गंगा, यमुना या त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाएं। यदि संभव न हो तो घर पर गंगा जल मिलाकर स्नान करें। स्नान के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप मन में करें, फिर सूर्य को अर्घ्य दें और साफ कपड़े पहनें। इससे पापों का नाश और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
2. दान:स्नान के बाद जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े, कंबल, तेल, दूध, अनाज या धन दान करें। पशु-पक्षियों को चारा डालना भी शुभ है। दान से पुण्य प्राप्ति और पितृ दोष निवारण होता है।
3. पूजा:भगवान विष्णु या शिव की पूजा करें। मंत्र "ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि, शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्" का 108बार जाप करें। ध्यान और प्रार्थना से आंतरिक शांति मिलती है।
4. तर्पण और पिंड दान:पूर्वजों के लिए तर्पण करें, जिसमें जल, तिल और कुशा से पितरों को तृप्त किया जाता है। पिंड दान से परिवार में सुख-शांति आती है। ये सभी ब्रह्म मुहूर्त या सुबह के समय में संपन्न करने से अधिक फलदायी होते हैं।
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