
सोनीपत: रिकार्ड गर्मी और पानी की बढ़ती डिमांड के बीच ग्राउंड वाटर सेल ने हरियाणा के सोनीपत जिले में भूजल स्तर की जांच के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। ब्लाक स्तर पर शुरू किए गए सर्वे की रिपोर्ट जून माह के अंतिम दिनों तक फाइनल कर दी जाएगी। जिसके बाद पता चल पाएगा कि मौजूदा समय में हमारी धरती में कितना पानी बचा हुआ है। ग्राउंड वाटर सेल की निगाहे सोनीपत के डार्क जोन पर भी टिकी हुई है, जहां स्थिति पिछले सालों से चिंताजनक बनी हुई है।
इस बार मार्च माह से ही रिकार्ड गर्मी पड़ रही है, जिसके चलते भूजल का दोहन भी काफी बढ़ गया है। भूजल सर्वे रिपोर्ट आने के बाद परिस्थितियों को बदलने के लिए आवश्यक उठाए जाने वाले कदमों को लेकर ग्राउंड वाटर सेल मंथन करेगा, ताकि भूजल की स्थिति को और अधिक खराब होने से बचाया जा सके।सोनीपत जिले में भूजल सर्वे के लिए 6 टीमों का गठन किया गया है। उक्त टीमें ग्राउंड वाटर सेल द्वारा चयनित 140 प्वाइंट पर पहुंचकर भूजल स्तर मापेंगी। सोनीपत ब्लाक में लिए जहां 20 प्वाइंट चयनित किए गए है। वहीं मुरथल ब्लाक के लिए 17 जगहों पर पहुंचकर भूजल स्तर की जांच की जाएगी।
लगातार भूमिगत जल का स्तर गिरता जा रहा है और जहां सोनीपत से के काफी एरिया में डार्क जोन घोषित किया गया है और भूमिगत जल लगातार नीचे जा रहा है जिसके कारण आने वाले भविष्य के लिए जल की किल्लत हो जाएगी। गौरतलब है कि सीमा से यमुना नदी बहने के बावजूद सोनीपत जिले में पिछले कुछ वषों से भूजल स्तर चिंताजनक स्थिति तक नीचे गिरता जा रहा है। मुरथल, राई, गन्नौर जैसे ब्लाक तो डार्क जोन में शामिल है। ऐसे में भूजल स्तर पर पैनी नजर रखने के लिए रोहतक रेंज का ग्राउंड वाटर सेल साल में प्री मानसून व मानसून के बाद भूजल स्तर की जांच के लिए सर्वे करता है।
प्री मानसून सर्वे जून माह में शुरू होता था, परन्तु इस बार पड़ रही अत्यधिक गर्मी की वजह से इसे तय समय से 10 दिन पहले ही शुरू कर दिया गया है, ताकि समय पर सर्वे समाप्त कर रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जा सके। मई-जून माह में भूजल स्तर सबसे नीचे के स्तर पर पहुंच जाता है। वहीं जुलाई माह में मानसून की दस्तक के बाद अगस्त और सितम्बर माह में भूजल स्तर साल के सबसे ऊपरी स्तर पर होता है। ऐसे में मानसून से भूजल स्तर को कितना लाभ पहुंचा है, इसकी जांच के लिए अक्तूबर माह में फिर से भूजल सर्वे किया जाता है।
सोनीपत जिले में भूजल सर्वे के लिए 6 टीमों का गठन किया गया है। उक्त टीमें ग्राउंड वाटर सेल द्वारा चयनित 140 प्वाइंट पर पहुंचकर भूजल स्तर मापेंगी। सोनीपत ब्लाक में लिए जहां 20 प्वाइंट चयनित किए गए है। वहीं मुरथल ब्लाक के लिए 17 जगहों पर पहुंचकर भूजल स्तर की जांच की जाएगी। इसी तरह से गोहाना और गन्नौर ब्लाक में भी 15-15 प्वाइंट भूजल स्तर की जांच के लिए निर्धारित किए है। कथूरा ब्लाक की बात करे तो वहां से 14 प्वाइंट पर जांच के बाद भूजल की गहराई का पता चल पाएगा। खरखौदा ब्लाक में 25, मुंडलाना ब्लाक में 17 और राई ब्लाक के भी 17 प्वाइंटों पर पहुंचकर ग्राउंट वाटर सेल की टीम भूजल स्तर की जांच करेगी। टीम को जून माह के अंतिम दिनों तक रिपोर्ट तैयार करनी होगी, क्योंकि उसके बाद मानसून की दस्तक हो सकती है और भूजल स्तर की जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
गाउंड वाटर सेल हर पांच साल में भूजल सर्वे के दौरान पानी की गुणवत्ता की भी जांच करता है। जिसके तहत पता चलता है कि किस ब्लाक में कौन-कौन से ऐसे क्षेत्र है, जहां पानी कृषि योग्य नहीं बचा है। पानी गुणवत्ता के सर्वे को पंाच साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में इस बार ग्राउंड वाटर सेल पानी की गुणवत्ता की भी जांच करेगा। ग्राउंड वाटर सेल के अधिकारियों की माने तो भूजल स्तर की लगातार बिगड़ी परिस्थितियों को देखते हुए पानी की गुणवत्ता सर्वे को अब हर दो साल में करने का फैसला किया गया है। ऐसे में 2022 के बाद अगला भूजल गुणवत्ता सर्वे 2024 में किया जाएगा। इस सर्वे के तहत प्रत्येक ब्लाक से पानी के सैम्पल लिए जाते हैं और उनकी जांच लैब में की जाती है। पांच साल पहले हुए पानी गुणवत्ता के सर्वे में सोनीपत वासियों को राहत मिली थी, क्योंकि अधिकतर क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता कृषि योग्य थी।
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