Uttrakhand News: नशामुक्त भारत अभियान के तहत जिला प्रशासन देहरादून की ओर से बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में नशामुक्ति जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में 10 हजार युवाओं को नशे से दूर रहने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने की शपथ दिलाई गई। इस दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और शिक्षाविद् ललित मोहन जोशी ने युवाओं से नशे से दूर रहकर स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि जीवन में सही विकल्पों का चयन व्यक्ति के भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। युवाओं को सकारात्मक और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़कर नशे से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नशे की लत का असर केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे परिवार और समाज भी प्रभावित होते हैं। नशे से बचाव के लिए आत्म-अनुशासन, आत्म-नियंत्रण और अपने व्यवहार के प्रति सजग रहना जरूरी है।
जिलाधिकारी ने कहा कि नशे जैसी सामाजिक चुनौती से निपटने के लिए सरकार, प्रशासन, पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और अभिभावकों को मिलकर प्रयास करने होंगे। युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से जनपद के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
संस्कार और परिवार से शुरू होती है नशामुक्त समाज की नींव: ललित मोहन जोशी
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, सजग इंडिया के संस्थापक एवं CIMS & UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के अध्यक्ष शिक्षाविद् ललित मोहन जोशी ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने की शुरुआत परिवार और संस्कारों से होती है। माता-पिता का सम्मान, पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन, नैतिक मूल्यों की समझ और संस्कारयुक्त शिक्षा युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है और स्वस्थ, शिक्षित, संस्कारवान तथा जागरूक युवा ही राष्ट्र को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए उन्हें शिक्षा, कौशल विकास, खेल, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता जैसे सकारात्मक अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
ललित मोहन जोशी ने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसकी शिक्षा, व्यवहार, करियर और पारिवारिक जीवन को भी प्रभावित करता है। कई परिस्थितियों में यह हिंसा और अपराध जैसी सामाजिक समस्याओं से भी जुड़ सकता है। इसलिए युवाओं को नशे से बचाना परिवार, समाज और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने मित्रों, परिवारजनों तथा आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा, **“नशामुक्त युवा ही स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत की मजबूत नींव हैं।
अधिकारियों ने सामूहिक प्रयासों पर दिया जोर
कार्यक्रम में एडीएम स्मिता परमार और जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित अन्य अधिकारी, विशेषज्ञ एवं वक्ता उपस्थित रहे। एडीएम स्मिता परमार समेत अन्य अधिकारियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
वक्ताओं ने कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों को सामूहिक रूप से काम करना होगा। युवाओं को नशे से दूर रखकर उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यशाला के माध्यम से युवाओं को नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
Also read: Uttarakhand News: धामी सरकार का बड़ा कदम, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, युवाओं को नशे से बचाने पर जोर