Uttarakhand News: कॉमनवेल्थ गेम्स में उत्तराखंड के पैरा एथलीट शुभम जुयाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीतकर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। अपनी इस उपलब्धि के बाद शुभम 7 अगस्त को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करेंगे।
शुभम जुयाल की सफलता की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है। 1 अगस्त, 2022 का वो दिन था जब शुभम जुयाल का घुटना रिमूव करना पड़ा। उसने अपनी एक टांग एक्सीडेंट में खो दी। किसी भी व्यक्ति के लिए यह एक बेहद उदासी और निराशा भरा दिन था। पर शुभम एक सैनिक था, उसे जीवन में पहले भी कुछ कर गुजरने की इच्छा थी और वह ठान कर बैठा था कि कुछ अलग हट कर करना है। आर्मी विश्व का सबसे अच्छा परिवार है। यह अपने सैनिक की किसी अभिभावक से भी अधिक बेहतर ढंग से परवाह करता है। बीईजी में तैनात शुभम के जीवन में नई अंगड़ाई लेकर आया पुणे का आर्मी आर्टिफिशल इक्विपमेंट सेंटर। यहां शुभम को न केवल कृत्रिम पैर मिला बल्कि नए सपने भी दिखाई दिये कि आर्मी में पैरा-स्पोट्र्स। बस, क्या था शुभम ने पुणें में आर्मी के कोच से शाटपुट का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। इसके बाद शुभम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
शुभम बेहद भावुकता से उस 1 अगस्त 2022 को याद करता है और फिर उत्साह के साथ कहता है, सर, चार साल बाद एक अगस्त 2026 को ही मैंने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में सिल्वर मेडल जीत लिया। शुभम की यह कहानी एक फेरीटेल से ही है। आर्मी पैरा स्पोट्र्स ज्वाइन करने के बाद शुभम ने 2025 में नेशनल में ब्रांज मेडल, खेलो इंडिया में सिल्वर, ओपन नेशनल बंगलुरू में ब्रांज, वल्र्ड जीपी में सातवां स्थान, मोरक्को ग्रांड प्री. में ब्रांज, नेशनल में सिल्वर दिल्ली ग्रांड पी. में गोल्ड, और ग्लासगो कामनवेल्थ गेम्स में सिल्वर जीतने से पहले बंगलुरू में आयोजित नेशनल में ब्रांज मेडल जीता।
शुभम ने राष्ट्रमंडल खेलों में उत्तराखंड का नाम रोशन किया। उसने एफ57 कैटिगिरी में सिल्वर मेडल देश के नाम किया। जूडो खिलाड़ी उन्नति भी उत्तराखंड की है, उसे ब्रांज मेडल मिला है। शुभम के पिता भी आर्मी में थे। वह सैन्य अफसर बनना चाहता था, इसके लिए लगातार कोशिश भी कर रहा था। उसने एक्सीडेंट होने से पहले आर्मी कैडिट कोर का एग्जाम भी पास कर लिया था और इंटरव्यू बाकी थी कि हादसे का शिकार हो गया। तब उसे लगा कि दुनिया लुट गयी, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और आज वह भारत का एक नामी सितारा बन गया है।
शुभम के मुताबिक उसका लक्ष्य एशियन गेम्स के अलावा 2028 के ओलंपिक में मेडल हासिल करना है। उसकी जिद, जुनून और हौसला निश्चित ही उसे यह मुकाम हासिल करने में मदद करेगा। शुभम जुयाल को कामनवेल्थ गेम्स में इस जीत के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।