हरिद्वार जमीन घोटाले पर चला धामी सरकार का हंटर, DM-SDM समेत कई अधिकारी सस्पेंड

हरिद्वार जमीन घोटाले पर चला धामी सरकार का हंटर, DM-SDM समेत कई अधिकारी सस्पेंड

Haridwar Land Scam: उत्तराखंड के हरिद्वार में 54करोड़ रुपये के जमीन घोटाले ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को सख्ती से लागू करते हुए दो IAS, एक PCS अधिकारी समेत कुल 12लोगों को निलंबित कर दिया है। इस घोटाले की गहन जांच के लिए विजिलेंस विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?

दरअसल, हरिद्वार नगर निगम द्वारा सराय गांव में 33बीघा कृषि भूमि को 54करोड़ रुपये में खरीदने का मामला सामने आया। यह जमीन कूड़े के ढेर के पास स्थित थी और इसका कोई तात्कालिक उपयोग नहीं था। जांच में पाया गया कि इस जमीन का मूल्य लगभग 15करोड़ रुपये था। लेकिन इसे कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया।

जांच में यह भी सामने आया कि जमीन का भू-उपयोग (लैंड यूज) बदलने की प्रक्रिया असामान्य रूप से तेजी से पूरी की गई। इस तरीके की प्रक्रिया में महीनों लगते हैं। लेकिन इस जमीन को सिर्फ छह दिनों में लैंड यूज को कृषि से वाणिज्यिक (कमर्शियल) में बदल दिया गया। जिससे जमीन की कीमत 6,000रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़कर 25,000रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गई।

धामी सरकार का सख्त एक्शन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और वरिष्ठ IAS अधिकारी रणवीर सिंह चौहान को जांच का जिम्मा सौंपा। जिसके बाद इस मामले में चौहान ने 24लोगों के बयान दर्ज किए। साथ ही, दस्तावेजों की गहन जांच की और 100पेज की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इस रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार 03जून को धामी सरकार ने तुरंत कार्रवाई की।

इस कार्रवाई के चलते हरिद्वार के जिलाधिकारी और तत्कालीन नगर निगम प्रशासक कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त औऱ वर्तमान में अपर सचिव (स्वास्थ्य) वरुण चौधरी, तत्कालीन उप-जिलाधिकारी (SDM), हरिद्वार अजयवीर सिंह समेत वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार निकिता बिष्ट, राजेश कुमार और कमलदास को निलंबित कर दिया।

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