
Ballia Oil Discovery: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। यहां गंगा के कछार क्षेत्र में कच्चे तेल का भंडार खोजा गया है। इस इलाके में हर साल बाढ़ से खेती प्रभावित होती है। अब ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ONGC) ने इस तेल को निकालने के लिए खुदाई शुरू कर दी है। खुदाई का काम वैना रत्तूचक गांव में चल रहा है। यह खुदाई स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पांडेय के खेत में की जा रही है। यहां ONGCने खुदाई के लिए एक प्लांट स्थापित किया है।
ग्राम प्रधान महेश यादव के अनुसार, यह पूरा क्षेत्र गंगा के डूब क्षेत्र में आता है। हर साल बाढ़ की वजह से खेती प्रभावित होती है। गेहूं की फसल किसी तरह हो जाती है, लेकिन खरीफ और जायद की फसलें नष्ट हो जाती हैं। इस वजह से इलाके का विकास नहीं हो पाया। अब तेल भंडार की खोज से नए विकास की उम्मीद जगी है।
चित्तू पांडेय की जमीन पर खुदाई शुरू
ONGCके अनुसार, यह तेल भंडार चितबड़ा गांव से सागरपाली तक फैला हुआ है। वैना ग्राम सभा से सटे तीन किलोमीटर के क्षेत्र को सबसे उपयुक्त माना गया है। इस इलाके में चित्तू पांडेय के परिवार की सबसे ज्यादा जमीन है। इसलिए ONGCने उनसे तीन साल के लिए साढ़े छह एकड़ जमीन लीज पर ली है।
आधुनिक मशीनों से तेज हुआ खुदाई का काम
खुदाई के लिए अत्याधुनिक मशीनें असम से मंगाई गई हैं। इस कार्य को पूरा करने के लिए अन्य राज्यों से प्रशिक्षित कर्मचारी भी बुलाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तेल भंडार से बलिया जिले के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
गंगा कछार का ऐतिहासिक महत्व
गंगा कछार क्षेत्र सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों के लिए नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। चित्तू पांडेय ने बलिया को सबसे पहले आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के दौरान क्रांतिकारी इसी कछार में छिपते और गुप्त बैठकें किया करते थे।
अब, इसी ऐतिहासिक भूमि पर तेल भंडार की खोज से इसका महत्व और बढ़ गया है। यह खोज बलिया और पूरे उत्तर प्रदेश के लिए आर्थिक विकास के नए रास्ते खोल सकती है। इससे रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने की संभावना है।
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