
Kavad Yatra 2025: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति में डूबा होता है। इस दौरान कांवड़ यात्रा की गूंज हर तरफ सुनाई देती है। लाखों शिवभक्त गंगा के पवित्र जल को कांवड़ में भरकर सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं, ताकि अपने आराध्य का जलाभिषेक कर सकें। लेकिन इस बार सावन में एक ऐसी अनोखी कांवड़ यात्रा सामने आई है, जिसने न केवल आस्था, बल्कि मानवता और प्रेम की मिसाल पेश की है। यह कहानी है एक डॉक्टर की, जिसने एक बेटी की जान बचाई है। अब उसी बेटी के पिता ने उस डॉक्टर को अपना भगवान मानकर उनकी तस्वीर के साथ कांवड़ यात्रा की।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, उत्तर प्रदेश के बागपत के बड़ौत कस्बे के रहने वाले विशाल भारद्वाज की बेटी प्रीमैच्योर होने के कारण जन्म से ही उसकी हालात गंभीर बनी हुई थी। हालात इतनी नाजुक थी कि डॉक्टर्स ने उम्मीद ही छोड़ दी थी। लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी और बच्ची को निजी अस्पताल के डॉक्टर्स को दिखाया। इसी बीच, पिता की मुलाकात डॉ. अभिनव तोमर से हुई। उन्होंने न केवल बच्ची का इलाज किया, बल्कि पूरे परिवार को ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी लौटा दी।
पिता की अनोखी कांवड़ यात्रा
इसी के साथ सावन 2025की शुरुआत में पिता विशाल भारद्वाज ने एक अनोखा संकल्प लिया। उन्होंने फैसला किया कि इस बार वह अपनी कांवड़ यात्रा को न केवल भगवान शिव, बल्कि उस डॉक्टर को समर्पित करेंगे, जिन्होंने उनकी बेटी की जिंदगी बचाई। उन्होंने ने अपनी कांवड़ को विशेष रूप से सजाया, जिसमें उन्होंने भगवान शिव की तस्वीर के साथ-साथ डॉ. अभिनव तोमर की तस्वीर भी लगाई। इस कांवड़ में एक तरफ गंगाजल का कलश है, तो दूसरी तरफ उनकी डॉक्टर की तस्वीर थी।
बच्ची के पिता ने हरिद्वार के हर की पौड़ी से गंगाजल भरकर अपनी यात्रा शुरू की। उनकी योजना 150 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर अपने गांव के शिव मंदिर में जलाभिषेक करने की है। इस दौरान वह रोजाना 15-20 किलोमीटर की यात्रा तय कर रहे हैं और उनके साथ उनकी पत्नी और बेटी भी कुछ हिस्सों में शामिल हो रही हैं।
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